NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 1 दो बैलों की कथा (लेखक -प्रेमचन्द )
सी. बी. एस. सी. सिलेबस सोलुशन कक्षा 9 के लिए
क्षितिज भाग-1 ,गद्य खण्ड केसमस्त अध्याय के सार एवं प्रश्नोत्तर
Chapter-1 ,दो बैलों की कथा (लेखक -प्रेमचन्द )का सार
दो बैलों की कथा कहानीकर मुंशी प्रेमचन्द जी की एक प्रशिद्ध कहानी हैं। जिसके पात्र दो बैल है। हीरा और मोती नाम के दो बैल जो सीधे -सादे भारतीय लोगों के प्रतीक के रूप में दर्शाये गए है। ये शक्तिशाली ,मेहनती और कमाऊ होने के बाबजूद अंग्रेजों के मनमाने अत्याचार सहते है।मुंशी प्रेमचंद जी का मुख्य उद्देश्य इस कहानी के माध्यम से भारतीयों की दशा का चित्रण करना हैं।
विद्यार्थिओं , गधे और बैल को बुद्धिहीनता और सहनशीलता के मामले में लगभग एक माना गया। परन्तु बैल को सीधे-सादे और बुद्धि के लिहाह से कुछ ऊपर माना जाता है। इस कहानी में झुरी काछी नाम का एक व्यक्ति है। जिसके पास दो बैल है। जो पछाईं जाति के है। दोनों की शारीरिक बनाबट सुन्दर ,सुडौल ,चौकस फुर्तीली है। दोनों एक साथ रहते ,खाते ,पीते और धौल-धप्पा करते ,एक-दूसरे को चाटते,सूंघते अपना प्रेम भाव प्रकट करते साथ ही साथ आंखों से एक-दूसरे से अपनी बात कहते है।
किसी संयोगवश झुरी अपने दोनों बैलों को अपनी ससुराल भेज देता है। और बेचारे बैलों को ये समझ आता है कि उन्हें बेच दिया गया है। अतः वे अड़ जाते झुरि का साला उन्हें ले जाने के लिए आगे की ओर जोर लगता तो वे दोनो पीछे की ओर। और बड़ी ही मुश्किल से शाम होते -होते किसी प्रकार वे दोनों एक नए स्थान को पह्चते है। जँहा उन दोनों का जरा भी मन नहीं लगता।और न ही वे दोनो कुछ खाते।नया घर उन्हें बेगाना सा लगता है।
जब रात हुई तो दोनों बैलों ने एक दूसरे को कनखियों से देखा। चुपचाप सलाह की। और पगहे तोड़कर झुरी के घर की ओर चल पड़े झुरी ने जब सुबह अपने दोनों बैलों को चरने के पास देखा तो वह गदगद हो गया है। बैलों की आँखों में विद्रोह भरा स्नेह था। घर और गांव के बच्चे उनका स्वागत करने लगे। हाँ , पत्नी जरूर कुद्ध हुई। वह उन्हें नमकहराम कहने लगी। पत्नी गुस्से के मारे दोनों को सूखा चारा दे आयी अब दोनों बैल खाये तो खाये कैसे झुरी ने नौकर से कहा की वह चारे में खली मिला दे परन्तु नौकर मालकिन के डर से ऐसा कर न सका।
दोबारा एक बार फिर से झुरी का साला अगली सुबह दोनों को लेने आया। और बड़ी ही बेरहमी से ले गया और अब की बार उसने उन दोनों को एक बहुत ही मोटी रस्सी से बांध दिया ,खाने में सिर्फ सुखी घास दी। दोनों को बहोत ही गुस्सा आया और अपना अपमान महसूस हुआ।अतः दूसरे दिन दोनों बैलों ने हल में जुतने से मना कर दिया। और अपनी जगह से हिले तक नहीं। इस पर झुरी के साले ने दोनों को डंडे से मारा। फिर भी दोनों तैयार नहीं हुए। उल्टा दोनों हल लेके ही भाग गए। जिससे साले का हल,जोट सब टूट के बराबर हो गया। लेकिन पकड़े गए। और मार भी पड़ी।
उन दोनों की इन हरकतों के वजह से उन्हें खाने में सिर्फ सूखा चारा ही दिया जाता था।लेकिन शाम को साले (भैरो )की नन्ही बेटी दो रोटी लेके आयी । तब जा के दोनों को थोड़ा अच्छा लगा। बैलों को जब ये पता चला की इस बच्ची की माँ नहीं है। और सौतेली माँ इसे बहोत परेशान करती है। उन दोनों का मन हुआ की भैरो और उसकी पत्नी को उठा के फेंक दे लेकिन बच्ची के स्नेह के कारण वो बेवस थे। अगली बार उन्होंने फिर से भागने की योजना बनायीं। और दोनों मिलकर रस्सी को कमजोर करने लगे। परन्तु तभी उस छोटी लड़की ने आकर दोनों बैलों के रस्सी खोल दी। लेकिन उस प्यारी लड़की से स्नेह और लगाव होने के कारण वे दोनों जाने को तैयार नहीं थे। लेकिन तभी लड़की ने शोर मचाना शुरू कर दिया। कि फूफा जी वाले बैल भागे जा रहे है। इधर हीरा और मोती ने भी मौके को समझ के कर भागना शुरू कर दिया। भैरो ,गया और गांव वाले भी उन दोनों के पीछे भागे। कि उन दोनों को पकड़ सके।
दोनों रास्ता भटक गए। दोनों नए -नए गांव पार करते और आगे बढ़ते चले गए। रास्ते में उन दोनो को एक मटर का खेत मिला।दोनों ने जी भर के मटर खायी और खूब उछल कूद की।अचानक वहा एक साँड आ गया। दोनों डर गए और सोचने लगे की इसका मुकाबला कैसे करे। दोनों ने सलाह की और मिलकर उस पर हमला किया। साँड़ एक से लड़ता तो दूसरा उसके पेटऔर पीछे हमला करता। साँड़ को दो से लड़ने की कला और आदत तो थी नहीं। अतः वह जमीन पर बेदम होकर गिर पड़ा। बाद में दोनों को तरस आ गया और उसे वही छोड़ के आगे बढ़ गए। दोनों बहुत ही खुश थे और ख़ुशी के मारे ,मटर के खेत में चले गए।मोती मटर खाने लगा तभी दो आदमी वहा लाठियां लेके आये हीरा तो भाग निकला परन्तु मोती पकड़ा गया। मोती को फंसा देख हीरा भी वापस आ गया और पकड़ा गया दोनों रखवालों ने हीरा और मोती का पकड़ के काँजीहौज में बंद कर दिया।
काँजीहौस में उन्हें खाने के लिए कुछ भी न मिला।वहाँ पहले से कई भैसे ,गाय ,बकरियाँ और घोड़े गधे थे भूख और प्यास से जमीन पर मरे समान पड़े थे। मोती और हीरा भूख के मारे मरे जा रहे थे। दोनों ने दीवार को चाटन शुरू कर दिया। रात के समय हीरा को जोश आया कि मैं यहाँ से भाग के ही दम लूँगा ।इस लिए उसने दीवार पर जोर -जोर अपने नुकीले सींग मारना शुरू कर दिया।आवाज सुन कर वहां का चौकीदार आ गया।उसने हीरा की इस हरकत को देखा तो उसे बहुत ज्यादा गुस्सा आया और उसने हीरा को डंडे से खूब मारा। इधर मोती यह सब देख रहा था। उसने भी माटी की दीवार पर अपने सींगों से जोर जोर से मारना शुरूकर दिया। अब दोनों के जोरदार प्रयास के बाद आधी दीवार टूट गयी। अब वहा मौजूद कई जाने लगभग आजाद हो गयी। सबसे पहले घोड़ियाँ भाग निकली फिर बकरियाँ और भैंसे परन्तु गधे वहां से न हिले और नहीं भागे मोती ने उनको धक्के मार कर निकला इस पर गधे तर्क करते हुए बोले भागने से क्या फायदा फिर पकड़े जायेगे।परन्तु हीरा मोटी- मोटी रस्सियों में बंधा था वो भागने में सक्षम न था। इस लिए मोती ने विचार किया कि वह भी नहीं भागेगा और भागेगा तो हीरा को साथ लेके जायेगा। तबतक सुबह होने को आयी और काँजीहौज के कर्मचारियों में हड़कम्प मच गया। मोती पकड़ा गया उसकी खूब जमके धुलाई की गयी और उसे भी हीरा की तरह मोटी -मोटी रस्सीयों में बांध दिया गया।
लगभग एक हफ्ते तक दोनों बैलों को वहां रखा गया। तबतक उन्हें खाने को कुछ न मिला। बस दिन में एक बार पानी ही दिया जाता था। भोजन के आभाव में उन दोनों के कंकाल दिखने लगे थे। एक दिन वे दोनों नीलामी के लिए लेजाए गए। लेकिन उन्हें कोई भी खरीदार लेने को तैयार न था। अंततः एक कसाई ने उन्हें खरीद लिया। वह जिस प्रकार से उनके कूल्हे में उंगली से दाब के देख रहा था। उससे हीरा और मोती की जान निकली जा रही थी। नीलामी के बाद दोनों उस दढ़ियल कसाई के साथ चले जा रहे थे। साथ ही साथ ऊपर वाले को याद करके कह रहे थे कि उनका अब क्या होगा। रास्ते में उन्हें कुछ गाय,भैसे दिखी जो खूब उछाल कूद कर रही। उन्हें देख दोनों बैल सोचने लगे की ये कितने स्वार्थी है। कि उन्हें हमारी जरा भी चिंता नहीं है। चलते चलते उन्हें सहसा ये महसूस हुआ कि ये रास्ते कुछ जाने माने से है। उन्होंने उत्त्पात माचना शुरू कर दिया और देखते देखते दोनों रस्सी छुडाके भाग निकले। और सीधा अपने मालिक के घर जा खड़े हुए। झुरी ने जब उन्हें देखा तो उसकी प्रसन्ता का ठिकाना न रहा। झुरी ने उन दोनो को गले लगा लिया ,दोनों बैल भी अपने मालिक के हाथ को चाटने लगे। तबतक वह दढ़ियल कसाई वहां आ पहुचा और बोला इसे मैंने नीलामी से ख़रीदा है अतः ये मेरे है। झुरी ने कहा चले जाओ यहाँ से क्योकि इन दोनों पर मेरा अधिकार है। दोनों बैलों ने भी झुरी का साथ दिया और कसाई को सिंगो से मरने का प्रयास कर उसे भागने पर विवश कर दिया। झुरी ने प्रसन्न हो कर पुनः गले से लगा लिया और खाने में भूसा,खले और चोकर मिला कर दिया। अब इस पूरी की घटना के बाद झुरि की पत्नी को भी दोनों से लगाव हो जाता है।
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 1 दो बैलों की कथा (लेखक -प्रेमचन्द )
सी. बी. एस. सी. सिलेबस सोलुशन कक्षा 9 के लिए
क्षितिज भाग-1
गद्य खण्ड के पाठ-1 दो बैलों की कथा के प्रश्नोत्तर (पाठ्य पुस्तकेनुसार )
प्रश्न. १-कांजीहौज में कैद पशुओं की हाजिरी क्यों ली जाती होगी ?उत्तर -कांजीहौज एक प्रकार से पशुओं की जेल थी। उसमे प्रायः ऐसे पशुओं को कैद किया जाता था। जो दूसरों के खेतों में घुस कर फसलों को नष्ट किया करते थे। इसलिए कांजीहौज के मालिक की ये जिम्मदारी थे की वह उन्हें जेल में सुरक्षित रखे और भागने न दे। इस लिए प्रतिदिन पशुओं की हाजिरी ली जाती होगी।
प्रश्न. २-छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया ?उत्तर -छोटी बच्ची की माँ इस दुनिया में न थी। वह माँ के बिछुड़ने का दर्द जानती थी। इसलिए जब उसने हीरा और मोती की दुर्दशा देखी तो उसके मन में उन दोनों के प्रति प्रेम उमड़ आया। उसे लगा कि ये भी मेरी तरह व्यथित हैं।
प्रश्न. ३ -कहानी में बैलों के माध्यम से कौन-कौन से नीति -विषयक मूल्य उभर कर आये है ?उत्तर -इस कहानी के माध्यम से जो नीति -विषयक मूल्य उभर के सामने आये वो निम्न प्रकार है।- आज के समय में सरल -सीदा और सहनशील होना पाप है। सीधे इंसान को लोग मुर्ख या गधा समझते है। अतः मनुष्य को अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत रहना चाहिए।
- आजादी अनमोल है। इसे पाने के लिए मनुष्य को बड़े से बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
- समाज के सुखी संपन्न लोगो की भी जिम्मेदारी है कि वे आजादी की लड़ाई में योगदान दे।
प्रश्न. ४ - प्रस्तुत कहानी में प्रेमचंद ने गधे की किन स्वभावगत विशेषताओं के आधार पर उसके प्रति रूढ़ अर्थ ‘मूर्छ प्रयोग न कर किस नए अर्थ की ओर संकेत किया है?उत्तर -गधा के स्वाभाव की दो मुख्य विशेषताएँ है। १-मूर्खता २-सरलता और सहनशीलता लेखक ने इस कहानी के माध्यम से ये कहना चाहा है कि ''सद्गुदों का इतना अनादर कहीं नहीं देखी। कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है। ''
प्रश्न ५ -किन गुणों से पता चलता है।की मोती और हीरा में गहरी दोस्ती थी?उत्तर -इस कहानी में
ऐसी बहुत सी घटनाओं को दर्शाया गया है। जिससे पता चलता था कि दोनों में गहरी मित्रता
थी।
१-जब दोनों गाड़ी में जोते जाते थे तो वह
कोशिश करते थे। कि गाड़ी का आधिक भार दूसरे साथी के कंधे पे न जाके खुद के कंधे पर रहे।
२ -जब गया ने हीरा की नाक पे डंडा मारा तो
मोती से सहन न हुआ और वह हल ,जुआ और जोत सब लेकर भाग गया क्योकि वह ये सहन न कर सका।
३-जब उनके सामने एक विशालकाय साँड़ आ खड़ा
हुआ तो दोनों ने योजनापूर्वक एक-दूसरे का साथ
देते हुए उसका मुकाबला किया। साँड़ एक चोट करता तो दूसरा उस पर अपने नुकीले सींघो से
उस के पेट पर हमला करता आखिरकार साँड़ बेदम हो कर गिर पड़ा
४-मोती जब मटर के खेत में मटर कहते पकड़
गया ।तो हीरा उसे विपत्ति में अकेला देखकर वापस आ गया और वह भी मोती के साथ पकड़ा गया।
५- जब दोनों मटर के खेत में मटर खा के मस्त
होके एक-दूसरे को ठेलने लगे तो हीरा को क्रोध आ गया तो मोती तुरंत पीछे हाट गया और
दुश्मनी होने से रोक ली।
६-कांजीहौज में हीरा को दीवार तोड़ता देख
मोती भी उसका साथ देने लगा और लगभग दोनों ने मिलकर आधी से ज्यादा दीवार तोड़ डाली।
प्रश्न-६ -'लेकिन औरत जात पर सींघ चलाना माना है ये भूल जाते हो 'हीरा के इस कथन के माध्यम से स्त्री के प्रति प्रेम चंद्र के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-इस कथन के माध्यम से हीरा कहना चाहता था।कि समाज में स्त्रियों की साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। उन्हें शारीरिक यातनाएं दी जाती थी, इसलिए समाज में यह नियम बनाए जाते थे कि पुरुष सामाज उन्हें शारीरिक दंड न दे, हीरा और मोती भले इंसानों के प्रतीक हैं, इसलिए उनके कथन सभ्य समाज पर लागू होते हैं।असभ्य समाज में स्त्रियों को प्रताड़ना दी जाती थी।
- आज के समय में सरल -सीदा और सहनशील होना पाप है। सीधे इंसान को लोग मुर्ख या गधा समझते है। अतः मनुष्य को अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत रहना चाहिए।
- आजादी अनमोल है। इसे पाने के लिए मनुष्य को बड़े से बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
- समाज के सुखी संपन्न लोगो की भी जिम्मेदारी है कि वे आजादी की लड़ाई में योगदान दे।
१-जब दोनों गाड़ी में जोते जाते थे तो वह
कोशिश करते थे। कि गाड़ी का आधिक भार दूसरे साथी के कंधे पे न जाके खुद के कंधे पर रहे।
२ -जब गया ने हीरा की नाक पे डंडा मारा तो
मोती से सहन न हुआ और वह हल ,जुआ और जोत सब लेकर भाग गया क्योकि वह ये सहन न कर सका।
३-जब उनके सामने एक विशालकाय साँड़ आ खड़ा
हुआ तो दोनों ने योजनापूर्वक एक-दूसरे का साथ
देते हुए उसका मुकाबला किया। साँड़ एक चोट करता तो दूसरा उस पर अपने नुकीले सींघो से
उस के पेट पर हमला करता आखिरकार साँड़ बेदम हो कर गिर पड़ा
४-मोती जब मटर के खेत में मटर कहते पकड़
गया ।तो हीरा उसे विपत्ति में अकेला देखकर वापस आ गया और वह भी मोती के साथ पकड़ा गया।
५- जब दोनों मटर के खेत में मटर खा के मस्त
होके एक-दूसरे को ठेलने लगे तो हीरा को क्रोध आ गया तो मोती तुरंत पीछे हाट गया और
दुश्मनी होने से रोक ली।
६-कांजीहौज में हीरा को दीवार तोड़ता देख मोती भी उसका साथ देने लगा और लगभग दोनों ने मिलकर आधी से ज्यादा दीवार तोड़ डाली।
प्रश्न-६ -'लेकिन औरत जात पर सींघ चलाना माना है ये भूल जाते हो 'हीरा के इस कथन के माध्यम से स्त्री के प्रति प्रेम चंद्र के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-इस कथन के माध्यम से हीरा कहना चाहता था।कि समाज में स्त्रियों की साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। उन्हें शारीरिक यातनाएं दी जाती थी, इसलिए समाज में यह नियम बनाए जाते थे कि पुरुष सामाज उन्हें शारीरिक दंड न दे, हीरा और मोती भले इंसानों के प्रतीक हैं, इसलिए उनके कथन सभ्य समाज पर लागू होते हैं।असभ्य समाज में स्त्रियों को प्रताड़ना दी जाती थी।
प्रश्न -७-किसान जीवन वाले समाज में पशु और मनुष्य के आपसी संबंधों को कहानी में किस तरह व्यक्ति किया गया है?
उत्तर-किसान जीवन मैं पशुओं और मनुष्यों के आपसी संबंध बहुत गहरे और आत्मीय रहे हैं।किसान।पशुओं को घर में सदस्य की तरह रखते हैं, वह उन्हें प्रेम करते हैं और पशु भी अपने स्वामी के लिए जी जान देने को तैयार रहते हैं। इसका एक उदाहरण है जब झुरी अपने बैलों का नाम हीरा और मोती रखता है। इससे यही प्रतीत होती हैं कि वह पशुओं के प्रति स्नेह रखता।वह उन्हें अपनी आंखें।से दूर नहीं करना चाहता जब हीरा और मोती उसकी ससुराल से वापस लौटकर उसके दरवाजे पर आते हैं।तो उसका हृदय आनंद से प्रसन्नचित्त हो जाता है।गांव भर के बच्चे भी बैलों की स्वामीभक्ति देख कर।उनका अभिनंदन करते हैं। इससे पता चलता है कि किसान अपने पशुओं से मानवीय व्यवहार करते हैं।
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