NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 6 मेरे बचपन के दिन (लेखक-महादेवी वर्मा)
सी. बी. एस. सी. सिलेबस सोलुशन कक्षा 9 के लिए
क्षितिज भाग-1 ,गद्य खण्ड केसमस्त अध्याय के सार एवं प्रश्नोत्तर
CHAPTER मेरे बचपन के दिन (लेखक -महादेवी वर्मा)का सार
विस्तृत सारांश
परिचय
"मेरे बचपन के दिन" महादेवी वर्मा का एक आत्मकथात्मक निबंध है, जिसमें उन्होंने अपने बचपन की सादगी और खुशियों को याद किया है। यह पाठ उनके बचपन के दिनों के साथ-साथ उस समय की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति का भी वर्णन करता है।
बचपन की सादगी
महादेवी वर्मा का बचपन गाँव के प्राकृतिक और शांत वातावरण में बीता। उनके घर में बड़ा आँगन, बगीचा और पशु-पक्षी थे, जो उनके खेल और साथी थे। उन्होंने पशुओं से अपने लगाव का ज़िक्र किया है, जिन्हें वे अपना सच्चा दोस्त मानती थीं। उनका बचपन बहुत ही सादा था, जहाँ भौतिक सुविधाएँ कम थीं, लेकिन आत्मिक संतोष अधिक था।
पारिवारिक जीवन
महादेवी ने अपने घर में दादी की कहानियों और पारिवारिक उत्सवों का सुंदर चित्रण किया है। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके घर में हर त्यौहार का आनंद लिया जाता था। उनके परिवार के सदस्य भी प्रेम और आदर से भरे हुए थे, जो उनके जीवन को और भी समृद्ध बनाते थे।
आज के बचपन से तुलना
महादेवी वर्मा ने अपने बचपन की तुलना आज के बच्चों से की है। उनका मानना है कि आज के बच्चे आधुनिकता और तकनीक में उलझ गए हैं, जबकि उनके समय में बच्चे प्रकृति के साथ खेलते थे और जीवन के बड़े पाठ खुद ही खेल-खेल में सीख जाते थे।
निष्कर्ष
महादेवी वर्मा के इस निबंध से यह सीख मिलती है कि साधारण जीवन में भी सच्ची खुशी होती है। उनका बचपन सादगी से भरा था, लेकिन उसमें आत्मिक संतोष और खुशी थी, जो आज के बच्चों के जीवन से कहीं न कहीं गायब हो चुकी है।
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 6मेरे बचपन के दिन (लेखक -महादेवी वर्मा)
सी. बी. एस. सी. सिलेबस सोलुशन कक्षा 9 के लिए
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
प्रश्न-१- ‘मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है। इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि-
(क) उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी?
(ख) लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं?
उत्तर- (क)उस समय, यानी 1900 के आसपास, भारत में लड़कियों की स्थिति बहुत खराब थी। अक्सर उन्हें जन्म के तुरंत बाद मार दिया जाता था या उन्हें परिवार पर बोझ माना जाता था। अगर किसी घर में लड़की का जन्म हो जाता, तो वहां खुशी की जगह उदासी फैल जाती। महादेवी वर्मा अपने संस्मरण में लिखती हैं कि लड़के के जन्म की उम्मीद में सभी लोग उत्साहित होते, लेकिन जैसे ही लड़की के जन्म की खबर मिलती, सब चुपचाप चले जाते। ऐसे माहौल में लड़कियों को कम खाना देना, उन्हें घर के कामों में लगाना और पढ़ाई से दूर रखना आम बात थी।
(ख)आज लड़कियों के जन्म को लेकर स्थितियाँ पहले से कुछ बेहतर हुई हैं। शिक्षित लोग अब धीरे-धीरे लड़का-लड़की में फर्क कम करने लगे हैं। कई जागरूक परिवारों में लड़कियों का स्वागत वैसे ही होता है जैसे लड़कों का। शहरों में तो लड़कियों को भी लड़कों की तरह शिक्षा दी जाती है। लेकिन फिर भी लड़कियों के साथ भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आज भी भ्रूण-हत्या का मुख्य कारण लड़कियों के जन्म को रोकना ही है, जिससे देश में लड़के-लड़कियों का अनुपात असंतुलित हो रहा है। आश्चर्यजनक है कि देश के उन्नत शहरों में से एक, चंडीगढ़ में, सबसे कम लड़कियाँ हैं। वहाँ न तो शिक्षा की कमी है और न ही धन की, लेकिन समस्या लोगों की मानसिकता में है जो लड़कियों को कमतर मानती है।
प्रश्न-२ -लेख़िका उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाईं ?
उत्तर-लेखिका उर्दू-फ़ारसी इसलिए नहीं सीख पाई क्योंकि उसकी इस भाषा में कोई रुचि नहीं थी। उसे लगता था कि वह इसे नहीं सीख सकती। जब मौलवी साहब उसे उर्दू-फ़ारसी सिखाने आते थे, तो वह चारपाई के नीचे छिप जाती थी। अंत में, मौलवी साहब ने आना ही बंद कर दिया, और इस तरह लेखिका उर्दू-फ़ारसी नहीं सीख पाई।
प्रश्न 3.लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर-
लेखिका ने अपनी माँ के हिंदी-प्रेम और लेखन-गायन के शौक का वर्णन किया है। वे हिंदी तथा संस्कृत जानती थीं। इसलिए इन दोनों भाषाओं का प्रभाव महादेवी पर भी पड़ा। महादेवी की माता धार्मिक स्वभाव की महिला थीं। वे पूजा-पाठ किया करती थीं। सवेरे ‘कृपानिधान पंछी बन बोले’ पद गाती थीं। प्रभाती गाती थीं। शाम को मीरा के पद गाती थीं। वे लिखा भी करती थीं।
प्रश्न 3.लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर-लेखिका ने अपनी माँ के हिंदी प्रेम और उनके लेखन व गायन के शौक का वर्णन किया है। उनकी माँ हिंदी और संस्कृत में निपुण थीं, जिसका प्रभाव महादेवी पर भी पड़ा। उनकी माँ धार्मिक स्वभाव की थीं और नियमित पूजा-पाठ करती थीं। सुबह ‘कृपानिधान पंछी बन बोले’ जैसे भजन गातीं, और शाम को मीरा के पदों का गायन करती थीं। इसके साथ ही, वे लेखन का भी शौक रखती थीं।
प्रश्न-४ -जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा क्यों कहा है?
उत्तर-लेखिका ने जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को आज के समय में स्वप्न जैसा इसलिए कहा है क्योंकि दोनों परिवारों के बीच गहरे आत्मीय संबंध थे, भले ही वे अलग-अलग धर्मों से थे। भाषा और जाति की दीवार उनके बीच कोई बाधा नहीं थी। दोनों परिवार एक-दूसरे के त्योहारों और समारोहों में शामिल होते थे और चाची, ताई, देवर, दुल्हन जैसे रिश्तों से जुड़े थे। आज के संदर्भ में ऐसे संबंधों को पाना बहुत दुर्लभ हो गया है।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न-५-जेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थीं। जेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती?
उत्तर-अगर मैं जेबुन्निसा के स्थान पर महादेवी के लिए कुछ काम करती, तो मैं उनसे रिश्तों के आधार पर कुछ अपेक्षाएँ रखती। यदि मैं उनकी नौकरानी बनकर सहायता करती, तो मुझे मजदूरी के साथ-साथ उनके प्रेम और आदर की भी उम्मीद होती। अगर मैं उनकी सखी के रूप में उनकी मदद करती, तो केवल प्रेम और स्नेह की चाह होती। यदि मैं उनकी प्रशंसिका या कनिष्ठ साथी के रूप में काम करती, तो कभी-कभी उनकी कविता सुनने और पढ़ाई में मदद लेने का भी अवसर मिल जाता।
प्रश्न-६-महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे/करेंगी?
उत्तर-अगर मुझे चाँदी के कटोरे जैसा कीमती पुरस्कार मिलता और देशहित की बात होती, तो मैं खुशी-खुशी उसे दान कर देती। मेरे लिए देश का हित सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की भलाई में ही देशवासियों की भलाई छिपी होती है। ऐसा करके मुझे दोगुनी खुशी मिलती और मैं गर्व महसूस करती।
प्रश्न-७ -लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
उत्तर-परीक्षोपयोगी नहीं।
प्रश्न-८-महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।
उत्तर-परीक्षोपयोगी नहीं।
प्रश्न-९ -महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।
उत्तर-26 जनवरी, 20–
आज विद्यालय में गणतंत्र दिवस का आयोजन हो रहा है। सभी छात्र-छात्राएं और सैकड़ों अतिथि मंडप में मौजूद हैं। मेरे माता-पिता और कई परिचित लोग भी वहाँ बैठे हैं। मैं मंच के पीछे अपनी बारी का इंतज़ार कर रही हूँ, क्योंकि मुझे कविता बोलनी है। मैंने पहले भी मंच पर कविता पढ़ी है, लेकिन आज दिल बहुत धड़क रहा है। मेरे शरीर में अजीब-सी हलचल हो रही है। जैसे-जैसे मेरा बोलने का समय नज़दीक आ रहा है, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही है। अब मैं मंच पर होने वाले कार्यक्रम या किसी और की बात नहीं सुन पा रही हूँ। मेरा सारा ध्यान अपने नाम सुनने पर लगा है। मुझे डर है कि कहीं मैं कविता भूल न जाऊँ। इसलिए मैंने कविता का लिखित पाठ अपने हाथ में ले लिया है। अगर मुझे भूलने का डर हुआ, तो मैं इसका सहारा लूंगी। जैसे ही मेरा नाम पुकारा गया, मैंने खुद को सँभाल लिया। अब मेरे कदमों में आत्मविश्वास आ गया है। अब मैं नहीं भूलूंगी।
भाषा-अध्ययन
प्रश्न-१०-पाठ से निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए-
विद्वान, अनंत, निरपराधी, दंड, शांति।
उत्तर-विद्वान - विदुषी
निरपराधी - अपराधी
शांति - अशांति
अनंत - अंत
दंड - पुरस्कार
प्रश्न-११-निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग/प्रत्यय अलग कीजिए और मूल शब्द बताइए-
निराहारी – निर् + आहार + ई।
सांप्रदायिकता
अप्रसन्नता
अपनापन
किनारीदार
स्वतंत्रता
उत्तर-
उपसर्ग प्रत्यय मूल शब्द
निराहारी – निऱ ई आहार
सांप्रदायिकता – x इक, ता संप्रदाय
अप्रसन्नता – अ ता प्रसन्न
अपनापन – x पन अपना
किनारीदार – x दार किनारी
स्वतंत्रता – स्व ता तंत्र।
प्रश्न -१२-निम्नलिखित उपसर्ग-प्रत्ययों की सहायता से दो-दो शब्द लिखिए-
उपसर्ग – अन्, अ, सत्, स्व, दुर्
प्रत्यय – दार, हार, वाला, अनीय
उत्तर-
समस्त शब्द विग्रह समास का नाम
परमधाम परम धाम (घर) है जो (स्वर्ग) बहुव्रीहि
कुल-देवी कुल की देवी तत्पुरुष
पहले-पहल सबसे पहले अव्ययीभाव
पंचतंत्र पंच तंत्रों का समाहार द्विगु
उर्दू-फ़ारसी उर्दू और फ़ारसी द्वंद्व
रोने-धोने रोने और धोने द्वंद्व
कृपानिधान कृपा के निधान तत्पुरुष
प्रचार-प्रसार प्रचार और प्रसार द्वंद्व
कवि-सम्मेलन कवियों का सम्मेलन तत्पुरुष
सत्याग्रह सत्य के लिए आग्रह तत्पुरुष
जेब-खर्च जेब के लिए खर्च तत्पुरुष
छात्रावास छात्रों के लिए आवास तत्पुरुष
जन्मदिन जन्म का दिन तत्पुरुष
निराहार बिना आहार नञ् तत्पुरुष
ताई-चाची ताई और चाची द्वंद्व
प्रश्न-१३-पाठ में आए सामासिक पद छाँटकर विग्रह कीजिए-
पूजा-पाठ पूजा और पाठ
उत्तर -पाठ में आये अन्य सामासिक पद इस प्रकार है.
समस्त शब्द विग्रह समास का नाम
पहले-पहल सबसे पहले अव्ययी भाव
कवि-सम्मेलन कवियों का सम्मेलन तत्पुरुष
छात्रावास छात्रों के लिए वास तत्पुरुष
उर्दू-फ़ारसी उर्दू और फारसी द्वन्द
प्रचार-प्रसार प्रचार और प्रसार द्वन्द
कृपानिधान कृपा के निधान तत्पुरुष
ताई-चाची ताई और चाची द्वन्द
जन्मदिन जन्म का दिन तत्पुरुष
पठेत्तर सक्रियता
प्रश्न-१४-बचपन पर केंद्रित मैक्सिम गोर्की की रचना ‘मेरा बचपन’ पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
उत्तर-परीक्षा उपयोगी नहीं है।
प्रश्न-१५- ‘मातृभूमि : ए विलेज विदआउट विमेन’ (2005) फ़िल्म देखें। मनीष झा द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म में कन्या भ्रूण हत्या की त्रासदी को अत्यंत बारीकी से दिखाया गया है।
उत्तर-परीक्षा उपयोगी नहीं है।
प्रश्न-१६-कंल्पना के आधार पर बताइए कि लड़कियों की संख्या कम होने पर भारतीय समाज का रूप कैसा हो?
उत्तर-यदि लड़कियों की संख्या कम होती रही, तो भारतीय समाज का संतुलन बिगड़ जाएगा। इससे समाज का स्वरूप विकृत हो जाएगा और लड़कों के लिए विवाह करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी स्थिति में महिलाओं की खरीद-फरोख्त जैसी घटनाएँ बढ़ सकती हैं। समाज में अनैतिकता, बलात्कार, अपहरण और दुराचार की घटनाओं में वृद्धि होगी, जिससे समाज में अव्यवस्था और अशांति का माहौल पैदा हो सकता है। अगर लड़कियों की संख्या इसी तरह घटती रही, तो एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब हर लड़की को द्रौपदी की तरह परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।
