"NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 13: Bachche kam par ja rahe hai: Explanation and Questions & Answers''
बच्चे काम पर जा रहे है का भावार्थ
👉कोहरे से ढँकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे है
सुबह सुबह
बच्चे काम पर जा रहे है
हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह
भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना
काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे ?
भावार्थ-कवि इन पंक्तियों में सुबह की ठंडऔर कोहरे से ढकी सड़क का चित्रण करते हुए उन बच्चों की दुर्दशा का वर्णन कर रहा हैं, जो खेल-कूद और स्कूल जाने की उम्र में काम पर जा रहे हैं। कोहरे से ढकी सड़क पर इन बच्चों को अपने घर की जरूरतों और गरीबी के कारण मजबूरी में काम पर जाना पड़ता है। यह दृश्य न केवल दयनीय है बल्कि हमारे समाज की विफलता को भी उजागर करता है।
कवि कहता है कि बच्चे काम पर जा रहे हैं पंक्ति हमारे समय की सबसे भयानक सच्चाई को प्रकट करती है। यह सच्चाई हमें झकझोरती है, क्योंकि यह बताती है कि बच्चे, जिनका बचपन शिक्षा और आनंद का होना चाहिए, अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को उठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका बचपन उनसे छिन गया है, और वे इस स्थिति में जीवित रहने पर विवश हैं।
कवि इस स्थिति को केवल एक विवरण तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि वह इसे एक सवाल के रूप में उठाना चाहते हैं। बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं? यह प्रश्न समाज और सरकार दोनों से पूँछना चाहते है । कवि कहते हैं कि इसे केवल आंकड़ों या कागजों तक सीमित रखने के बजाय, इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह सवाल उठाने की जरूरत है कि ऐसी परिस्थितियां क्यों बनीं, जिनके कारण इन बच्चों को शिक्षा छोड़कर मजदूरी करनी पड़ रही है। आखिर क्यों उनका बचपन उनसे छीन लिया गया?
यह कविता हमें आत्मचिंतन और बाल श्रम की समाप्ति के लिए ठोस कदम उठाने की प्रेरणा देती है।
👉क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदें
क्या दीमकों ने खा लिया है
सारी रंग बिरंगी किताबों को
क्या काले पहाड़ के निचे दब गए हैं सारे खिलौने
क्या किसी भूकंप में ढह गई हैं
सारे मदरसों की इमारतें
क्या सारे मैदान , सारे बगीचे और घरों के आँगन
ख़त्म हो गए हैं एकाएक
भावार्थ-उपरोक्त पंक्तियों में कवि बच्चों को काम पर जाते देख कर उनकी विवशताओं पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया है कि बच्चों को खेल-कूद और पढ़ाई छोड़कर काम पर जाना पड़ रहा है। कवि कई सवालों के माध्यम से इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं।
कवि पूछते हैं कि क्या बच्चों की खेलने वाली गेंदें अंतरिक्ष में चली गई हैं? क्या उनकी रंग-बिरंगी कहानियों की किताबें दीमकों ने चट कर ली हैं? क्या उनके खिलौने किसी काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं? या फिर स्कूलों की इमारतें किसी भूकंप की वजह से ढह गई हैं, जिससे उनकी शिक्षा रुक गई है?
इसके बाद कवि और सवाल करते हैं—क्या बच्चों के खेलने के मैदान और बगीचे, जहां वे तितलियों को पकड़ने या फल-फूल तोड़ने के लिए दौड़ते-भागते थे, अब खत्म हो गए हैं? और घरों के आंगन, जहां वे दिनभर अपनी मस्ती में धमाचौकड़ी करते थे, क्या वह सब गायब हो गया है?
कवि इन सवालों के माध्यम से इस कटु सच्चाई को उजागर करते हैं कि समाज ने बच्चों के बचपन को उनसे छीन लिया है। वे हमसे पूछते हैं कि ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बन गई हैं, जिनकी वजह से इन बच्चों को काम पर जाना पड़ रहा है, और उनका बचपन इस तरह समाप्त हो रहा है।
👉तो फिर बचा ही क्या है इस दुनिया में ?
कितना भयानक होता अगर ऐसा होता
भयानक है लेकिन इससे भी ज़्यादा यह
कि हैं सारी चींजे हस्बमामूल
पर दुनिया की हज़ारों सड़कों से गुजरते हुए
बच्चे , बहुत छोटे छोटे बच्चे
काम पर जा रहे हैं।
भावार्थ-कवि इन पंक्तियों में बच्चों के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि अगर सच में बच्चों के खेलने के सामान, किताबें, स्कूल, बगीचे और आंगन सब खत्म हो गए होते, तो यह दुनिया कितनी डरावनी लगती। लेकिन इससे भी अधिक भयावह यह सच्चाई है कि यह सब कुछ मौजूद है, सब सामान्य है, फिर भी बच्चे इनका आनंद नहीं ले पा रहे हैं।
कवि आगे कहते हैं कि दुनिया की हजारों सड़कों पर बहुत छोटे-छोटे बच्चे अपने मासूम बचपन को पीछे छोड़ काम पर जाते दिखाई देते हैं। यह स्थिति समाज की विफलता और इंसानियत की गिरावट को दर्शाती है। यह सवाल उठाता है कि आखिर क्यों इन बच्चों को खेलने-कूदने और पढ़ाई करने की उम्र में काम करना पड़ रहा है?
"NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 13: Bachche kam par ja rahe hai: Questions & Answers''
इसके साथ ही, कई बार बच्चों को परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए छोटी उम्र में ही काम करना पड़ता है। इसका परिणाम यह होता है कि उनका बचपन खेलने-कूदने और मनोरंजन से दूर हो जाता है। यह समस्या मुख्य रूप से समाज में गरीबी, जागरूकता की कमी और सही नीतियों के अभाव के कारण उत्पन्न होती है।
प्रश्न-४-दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा / रही है। फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता। इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं ?
उत्तर-इस उदासीनता के कई कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण है समाज में बच्चों के काम करने को लेकर जागरूकता का अभाव। हम यह मानने लगे हैं कि यह सामान्य है, क्योंकि यह स्थिति लंबे समय से चली आ रही है। बच्चों को काम पर जाते देखना अब एक आदत बन चुकी है और इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता।
इसके अलावा, गरीबी और आर्थिक तंगी के कारण माता-पिता को यह जरूरी लगता है कि बच्चे काम करें ताकि घर का खर्च चले। कभी-कभी यह भी होता है कि लोग अपनी दिनचर्या में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि बच्चों की मुश्किलों और उनके अधिकारों के बारे में सोचना या उनका समर्थन करना भूल जाते हैं।
प्रश्न-५-आपने अपने शहर में बच्चों को कब-कब और कहाँ-कहाँ काम करते हुए देखा है ?
उत्तर- मैंने अपने शहर में बच्चों को कई बार काम करते हुए देखा है। अक्सर सुबह के समय, जब स्कूल जाने का समय होता है, बच्चे सड़कों पर खोमचे पर फल, सब्जियाँ बेचते हुए या किसी दुकान पर काम करते हुए दिखाई देते हैं। कुछ बच्चे रेस्टोरेंट्स में बर्तन धोते हैं या कचरा इकट्ठा करने का काम करते हैं। सर्दी और गर्मी के मौसम में भी इन बच्चों को सडक किनारे काम करते हुए देखा है, जबकि वे खेलने की उम्र में होते हैं, लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण उन्हें काम करने पर मजबूर होना पड़ता है। यह दृश्य काफी दर्दनाक होता है क्योंकि इन बच्चों को शिक्षा की बजाय काम करने की आदत डाल दी जाती है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है।
प्रश्न-६-बच्चों का काम पर जाना , धरती के एक बड़े हादसे के समान क्यों है ?
उत्तर-बच्चे हमारे देश का उज्जवल भविष्य होते हैं, और उनका विकास देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर बच्चे पढ़ाई से दूर रहकर काम करने लगेंगे, तो न केवल उनका भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि देश का भविष्य भी अंधकारमय हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, आने वाली पीढ़ी भी निरक्षर रहेगी, और बच्चों का समग्र विकास नहीं हो पाएगा।
ज्ञान सबसे कीमती संपत्ति है, जो किसी भी व्यक्ति को जीवन में सफलता दिलाती है। बच्चों का काम पर जाना, उनके शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट डालता है, और यह देश के लिए एक गंभीर समस्या है। जब बच्चों को शिक्षा मिलती है, तब वे अपने समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान दे सकते हैं। इसलिए बच्चों का शिक्षा से वंचित रहना, धरती पर एक बड़े हादसे के समान है।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न-७-काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर अपने-आप को रखकर देखिये। आपको जो महसूस होता उसे लिखिए
उत्तर-अगर मैं काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर खुद को रखकर देखूं, तो मुझे बहुत दुख और निराशा महसूस होती। मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा समय, खेलने और सीखने का समय, जबरदस्ती काम करने में गुजर रहा है। स्कूल जाने की बजाय काम पर जाना, जैसे मुझे किसी बंधन में जकड़ लिया गया हो। मेरी आँखों में सवाल होते हैं कि क्यों मुझे भी वही अवसर नहीं मिल सकता जो दूसरे बच्चों को मिल रहा है, ताकि मैं भी अपनी पढ़ाई पूरी कर सकूं और एक अच्छा इंसान बन सकूं। काम करते हुए मैं थका हुआ महसूस करता, मेरे पास ना खेलने का समय होता और ना ही भविष्य को लेकर कोई उम्मीद। यह सब बहुत दुखी करने वाला होता।
प्रश्न-८-आपके विचार से बच्चों को काम पर क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए ? उन्हें क्या करने के मौके मिलने चाहिए ?
उत्तर-बच्चों को काम पर नहीं भेजा जाना चाहिए क्योंकि उनका सबसे महत्वपूर्ण काम पढ़ाई और खेलना होता है। काम पर भेजने से उनका बचपन छिन जाता है और वे जीवन के अच्छे अवसरों से वंचित हो जाते हैं। बच्चों को शिक्षा हासिल करने का पूरा अधिकार है, ताकि वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकें। उन्हें खेलने, किताबें पढ़ने, नए-नए चीजें सीखने और अपनी इच्छाओं के अनुसार बड़े होने का मौका मिलना चाहिए। इससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं और समाज में एक अच्छा योगदान देने के लिए तैयार होते हैं।
