NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 4 साँवले सपनों की याद पाठ का सार एवं प्रश्नोत्तर

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 4 साँवले सपनों की याद (जाबिर हुसैन)

सी. बी. एस. सी. सिलेबस सोलुशन कक्षा 9 के लिए

क्षितिज भाग-1 ,गद्य खण्ड केसमस्त अध्याय के सार एवं प्रश्नोत्तर 

Chapter-4,साँवले सपनों की याद (जाबिर हुसैन)का सार  

"साँवले सपनों की याद" पाठ में लेखक जाबिर हुसैन ने अपने बचपन की मासूमियत और गाँव के जीवन की सुंदरता का वर्णन किया है। इस पाठ में लेखक ने अपने गाँव के प्राकृतिक सौंदर्य, वहाँ के लोगों की सरलता और उनकी जीवनशैली को जीवंत तरीके से पेश किया है।

गाँव का वातावरण

लेखक अपने गाँव की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि कैसे गाँव के लोग अपनी मेहनत और समर्पण से अपनी ज़िंदगी को संवारते हैं। लेखक के शब्दों में, गाँव का वातावरण शांति और संतोष का प्रतीक है, जहाँ लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं।

बचपन की यादें

लेखक ने अपने बचपन के खेल-कूद और दोस्तों के साथ बिताए हुए पलों का जिक्र किया है। गाँव के बच्चे अपने खेलों में खोए रहते हैं, और ये खेल उन्हें न केवल मनोरंजन प्रदान करते हैं, बल्कि आपसी संबंधों को भी मजबूत बनाते हैं। लेखक ने अपनी प्यारी यादों को साझा करते हुए बताया कि कैसे वे प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रहकर अपनी मासूमियत और सच्चाई को जिंदा रखते हैं।

सपनों का महत्व

पाठ में सपनों का भी विशेष महत्व है। लेखक ने बताया है कि बचपन में उन्हें किस प्रकार के सपने देखने में आनंद आता था। वे बड़े होकर कुछ बनने की आकांक्षा रखते थे, जैसे डॉक्टर, शिक्षक, या किसी बड़े पद पर पहुँचने का सपना। ये सपने उन्हें प्रेरित करते थे और जीवन में आगे बढ़ने की ताकत देते थे।

संस्कृति और परंपराएँ

लेखक ने गाँव की संस्कृति और त्योहारों का भी उल्लेख किया है। गाँव में मनाए जाने वाले त्योहार जैसे होली, दीवाली, और ईद, लोगों को एकजुट करते हैं। ये पर्व न केवल खुशियाँ लाते हैं, बल्कि संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान भी जागरूक करते हैं।

सरलता और सच्चाई

पाठ में लेखक ने गाँव के लोगों की सरलता और सच्चाई को प्रमुखता दी है। गाँव के लोग अपनी मेहनत और ईमानदारी से जीते हैं, और वे अपनी खुशियों को छोटी-छोटी चीजों में खोजते हैं। यह सच्चाई हमें सिखाती है कि जीवन का वास्तविक सुख बाहरी चीजों में नहीं, बल्कि अपने अंदर और अपने संबंधों में है।

निष्कर्ष

लेखक अंत में यह संदेश देते हैं कि हमें अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि वे हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। यह पाठ केवल बचपन की यादों का एक संग्रह नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। सपने हमें अपने लक्ष्यों की ओर प्रेरित करते हैं और हमें संघर्ष करने की ताकत देते हैं।

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 4 साँवले सपनों की याद (जाबिर हुसैन)

सी. बी. एस. सी. सिलेबस सोलुशन कक्षा 9 के लिए 

क्षितिज भाग-1 

  गद्य खण्ड के पाठ-4 साँवले सपनों की याद केप्रश्नोत्तर (पाठ्य पुस्तकेनुसार )

प्रश्न-१-किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया और उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया?

उत्तर -बचपन में सालिम अली ने एक बार एयरगन से एक गौरैया को घायल कर दिया। इस घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। गौरैया की देखभाल और उसकी सुरक्षा में जुट जाने के बाद, उनका ध्यान पक्षियों की दुनिया की ओर बढ़ गया। इस अनुभव ने उन्हें पक्षियों के प्रति गहरी रुचि और प्रेम पैदा किया, जिससे वे एक समर्पित पक्षी प्रेमी बन गए।

प्रश्न-२-सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री के सामने पर्यावरण से संबंधित किन संभावित खतरों का चित्र खींचा होगा कि जिससे उनकी आँखें नम हो गई थीं?
 
उत्तर-सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सामने रेगिस्तान की गर्म हवाओं और उनके खतरनाक प्रभावों की बात की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन हवाओं से केरल की साइलेंट वैली की रक्षा नहीं की गई, तो वह नष्ट हो सकती है। उनकी इस बात में प्रकृति के प्रति गहरा प्रेम और चिंता झलकती थी, जिसे सुनकर उनकी आँखें भावुक हो गईं।

प्रश्न-३-लॉरेंस की पत्नी फ्रीडा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि ‘‘मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में ढेर सारी बातें जानती है?”

उत्तर-लॉरेंस की पत्नी, फ्रीडा, इस बात को अच्छी तरह समझती थीं कि उनके पति को गौरैया से बहुत प्यार था। लॉरेंस अपना अधिकांश समय गौरैया के साथ बिताते थे, और गौरैया भी उनके साथ एक बहुत करीबी दोस्त की तरह व्यवहार करती थी। इसी पक्षी प्रेम को व्यक्त करने के लिए फ्रीडा ने यह वाक्य कहा।

प्रश्न-४-आशय स्पष्ट कीजिए-
(क) वो लॉरेंस की तरह, नैसर्गिक जिंदगी का प्रतिरूप बन गए थे।
उत्तर -(क) लॉरेंस ने हमेशा बनावट से दूर रहकर एक साधारण और प्राकृतिक जीवन जीया। वे प्रकृति के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हुए उसकी सुरक्षा के लिए चिंतित रहते थे। इसी तरह, सालिम अली ने भी प्रकृति की देखभाल और सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयास किए, और उन्होंने अपने जीवन को सीधा और सरल रखा। दोनों ने प्राकृतिक जीवन के महत्व को समझा और उसे अपने जीवन में आत्मसात किया।

(ख) कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा!

उत्तर -(ख)मुत्यु एक ऐसा सत्य है जो मनुष्य को सांसारिक जीवन से दूर करके चिर निद्रा और विश्राम का अनुभव कराता है। इसके बाद उसकी सभी गतिविधियाँ—हंसना, गाना, चलना—सभी समाप्त हो जाती हैं। सालिम अली की भी यही स्थिति थी, वे अब मृत्यु की गोद में विश्राम कर रहे थे। उन्हें पहले जैसी अवस्था में लौटाना संभव नहीं था, और इस सत्य ने उनके जीवन के अंत को दर्शाया 

(ग) सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।
 
उत्तर -टापू समुद्र में एक छोटा सा भू-भाग होता है, जबकि सागर बहुत विशाल और गहरा होता है। इसी तरह, सालिम अली केवल थोड़ी-सी जानकारी से संतुष्ट नहीं थे। वे चाहते थे कि वे प्रकृति और पक्षियों के बारे में इतना ज्ञान प्राप्त करें कि वे असीमित ज्ञान के सागर के समान बन जाएं। उनके ज्ञान की प्यास उन्हें निरंतर सीखने और समझने के लिए प्रेरित करती रही।

प्रश्न-५-इस पाठ के आधार पर लेखक की भाषा-शैली की चार विशेषताएँ बताइए।

उत्तर- 1.मिश्रित शब्दावली का प्रयोग-  
इस पाठ में लेखक ने उर्दू, तद्भव, और संस्कृत शब्दों का अच्छा मिश्रण किया है। उर्दू शब्दों का प्रयोग अधिक है, जैसे जिंदगी, परिंदा, खूबसूरत, हुजूम, ख़ामोश, सैलानी, सफ़र, तमाम, आखिरी, माहौल, और खुद। संस्कृत शब्दों का भी समृद्धि से उपयोग हुआ है, जैसे संभव, अंतहीन, पक्षी, वर्ष, इतिहास, वाटिका, विश्राम, संगीतमय, और प्रतिरूप। जाबिर हुसैन की भाषा गंगा-जमुनी है, जहां संस्कृत और उर्दू के शब्द एक साथ इस तरह से प्रयुक्त होते हैं कि वे एक-दूसरे से मेल खाने लगते हैं, जैसे अंतहीन सफर, प्रकृति की नज़र, दुनिया संगीतमय, और जिंदगी को प्रतिरूप।

2. जटिल वाक्यों का प्रयोग-
जाबिर हुसैन की वाक्य रचना बंकिम और जटिल होती है। वे साधारण वाक्यों का प्रयोग नहीं करते, बल्कि उनके हर वाक्य में कलात्मकता होती है। उदाहरण के लिए, "सुनहरे परिंदों के खूबसूरत पंखों पर सवार साँवले सपनों का एक हुजूम मौत की खामोश वादी की तरफ अग्रसर है।" इसके साथ ही, वे इतिहास की जटिलताओं का भी जिक्र करते हैं, जैसे "पता नहीं, इतिहास में कब कृष्ण ने वृंदावन में रासलीला रची थी।"

3. अलंकारों का प्रयोग-
जाबिर हुसैन अलंकारों से भरी भाषा में लिखते हैं। उपमा और रूपक उनके प्रिय अलंकार हैं। उदाहरण के लिए,

  • "अब तो वो उस वन-पक्षी की तरह प्रकृति में विलीन हो रहे हैं" (उपमा) 
  • "सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाय अथाह सागर बनकर उभरे थे" (रूपक)। 
वे अपने लेखन में भावनाओं को जीवंत करने के लिए अलंकारों क प्रयोग करते हैं।

4. भावानुरूप भाषा-
ज़ाबिर हुसैन अपनी भाषा को भाव के अनुरूप ढालते हैं। कभी वे छोटे वाक्य इस्तेमाल करते हैं, जैसे "आज सालिम अली नहीं हैं।" और "चौधरी साहब भी नहीं हैं।" कभी वे उत्तेजना पैदा करने के लिए प्रश्न शैली का प्रयोग करते हैं, जैसे "कौन बचा है, जो अब सोंधी माटी पर उगी फसलों के बीच एक नए भारत की नींव रखने का संकल्प लेगा?" और "कौन बचा है, जो अब हिमालय और लद्दाख की बर्फीली जमीनों पर जीने वाले पक्षियों की वकालत करेगा?" इस तरह, उनकी भाषा भावनाओं और विचारों को बखूबी व्यक्त करती है।

प्रश्न-६.-इस पाठ में लेखक ने सालिम अली के व्यक्तित्व का जो चित्र खींचा है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर -

लेखक ने सालिम अली का चित्र इस तरह प्रस्तुत किया है:-

सालिम अली एक प्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी और प्रकृति-प्रेमी थे। उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण घटना तब हुई जब उनकी एयरगन से एक नीली कंठवाली गौरैया घायल होकर गिर गई। इस गौरैया की देखभाल और उससे संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्होंने जो प्रयास किए, उससे उनकी पक्षियों के प्रति गहरी जिज्ञासा जागृत हुई और वे एक पक्षी प्रेमी बन गए।उन्होंने दूर-दूर जाकर पक्षियों के बारे में जानकारियाँ इकट्ठा कीं और उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा चिंतित रहे। इसके साथ ही, वे केरल की साइलेंट वैली को रेगिस्तानी हवाओं से बचाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से भी मिले।इस प्रकार, वे प्रकृति की दुनिया के विशाल सागर की तरह उभरे।

प्रश्न-७-साँवले सपनों की याद’ शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर-'साँवले सपनों की याद' एक रहस्यमय शीर्षक है, जो पढ़ते ही पाठक के मन में कई सवालों को जन्म देता है, जैसे: ये कैसे सपने हैं? किसके हैं? और ये सपने साँवले क्यों हैं? कौन इन्हें याद कर रहा है?

यहाँ 'साँवले सपने' उन सुंदर इच्छाओं का प्रतीक हैं, जो प्रसिद्ध पक्षी-प्रेमी सालिम अली के जीवन से जुड़ी हैं। सालिम अली ने अपनी जिंदगी में सुनहरे पक्षियों की दुनिया में गहराई से डूबते हुए, उनकी सुरक्षा और खोज के सपनों में अपना मन रमाया। ऐसे सपने हर किसी के नहीं होते क्योंकि हर व्यक्ति पक्षी-प्रेम में इतना मग्न नहीं हो सकता। आज जब सालिम अली हमारे बीच नहीं हैं, तब लेखक को उनकी आँखों में बसे इन साँवले सपनों की याद आती है। यह शीर्षक गहराई लिए हुए है, जिसे पूरी तरह समझने के लिए इसे चंदन की तरह घिसना होगा ताकि इसके असली अर्थ और प्रभाव तक पहुँचा जा सके।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न-८- प्रस्तुत पाठ सालिम अली की पर्यावरण के प्रति चिंता को भी व्यक्त करता है। पर्यावरण को बचाने के लिए आप कैसे योगदान दे सकते हैं?

उत्तर -'साँवले सपनों की याद' में सालिम अली ने पर्यावरण के प्रति अपनी गहरी चिंता को व्यक्त किया है। उन्होंने केरल की साइलेंट वैली को रेगिस्तानी हवाओं से बचाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इसे संरक्षित रखने का आग्रह किया। इसी प्रकार, हम सभी भी पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कई तरह से अपना योगदान दे सकते हैं, जैसे:

१.अपने आसपास की खाली भूमि पर अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाएँ।
२. पेड़-पौधों की कटाई रोकने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाएँ।
३. लोगों को पेड़-पौधों का महत्व समझाएँ।
४. जल स्रोतों को प्रदूषित न करें और न ही दूसरों को करने दें।
५. फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे और विषैले जल को जलस्रोतों में जाने से रोकें।
६.प्लास्टिक की वस्तुओं का उपयोग कम से कम करें।
७. इधर-उधर कचरा न फेंकें और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकें।
८. पुनः उपयोग की जाने वाली वस्तुओं को अपनाएँ।
९. सूखी पत्तियों और कूड़े को जलाने से बचें और इस बारे में लोगों को भी जागरूक करें। 

पाठेत्तर  सक्रियता

विद्यार्थिओं पाठेत्तर सक्रियता में जो प्रश्न उत्तर दिए गए है। वो सभी परीक्षा उपयोगी नहीं है। 

अतः उन प्रश्नों को उत्तर के साथ नहीं लिखा गया है। 


प्रिय विद्यार्थिओं ! यहाँ पर साँवले सपनों की याद पाठ का सार और पाठ्य पुस्तक के प्रश्नों  के उत्तर दिये गए है। जो परीक्षा की दृष्टि सेबहुत  ही उपयोगी है।  

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