NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 5 प्रेमचंद के फटे जूते (हरिशंकर परसाई)
सी. बी. एस. सी. सिलेबस सोलुशन कक्षा 9 के लिए
क्षितिज भाग-1 ,गद्य खण्ड केसमस्त अध्याय के सार एवं प्रश्नोत्तर
CHAPTER 6 प्रेमचंद के फटेजूते (हरिशंकर परसाई) का सार
प्रेमचंद के फटे जूते हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित एक अत्यंत गहन और व्यंग्यात्मक रचना है, जो भारतीय साहित्य के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद की सादगी, गरीबी, और संघर्ष को उजागर करती है। इस पाठ के माध्यम से लेखक ने प्रेमचंद के व्यक्तिगत जीवन की कठिनाइयों और उनके आत्मसम्मान को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया है। आइए इस रचना का विस्तृत सारांश देखें:
विस्तृत सारांश
1. प्रस्तावना:
हरिशंकर परसाई की यह व्यंग्य रचना "प्रेमचंद के फटे जूते" केवल प्रेमचंद के जूतों की स्थिति का विवरण नहीं देती, बल्कि उनके जीवन के संघर्षों और सादगी को भी दर्शाती है। परसाई ने अपने तीखे व्यंग्य के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया है कि किस प्रकार समाज अपने महान साहित्यकारों की वास्तविक परिस्थितियों की उपेक्षा करता है।
2. प्रेमचंद की फोटो का वर्णन:
कहानी की शुरुआत प्रेमचंद की एक प्रसिद्ध फोटो से होती है, जिसमें वे मंच पर बैठे हुए हैं और उनके पैर एक ओर मुड़े हुए हैं। परसाई जी का ध्यान खासतौर से उनके जूतों पर जाता है, जो फटे हुए हैं। लेखक इन जूतों को केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रेमचंद के पूरे जीवन और संघर्षों का प्रतीक मानते हैं।
फटे जूते प्रेमचंद की गरीबी का प्रतीक हैं, लेकिन यह भी दिखाते हैं कि उनकी रचनाओं की तरह उनका जीवन भी सादगी और संघर्षों से भरा था। वे अपनी आत्मा को अमीर बनाए रखने में लगे रहे, भले ही उनका जीवन गरीबी में बीता हो। प्रेमचंद की ये फटे जूते हमें उनकी रचनाओं में दिखाई देने वाले गरीबी और शोषण के दृश्यों से जोड़ते हैं।
3. लेखक का चिंतन और व्यंग्य:
परसाई जी ने प्रेमचंद के जीवन पर व्यंग्यात्मक शैली में चिंतन किया है। वे कहते हैं कि समाज अपने साहित्यकारों का सम्मान करता है, लेकिन उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति और कठिनाइयों को नजरअंदाज कर देता है। प्रेमचंद की फटी जूतों की फोटो देखकर लेखक के मन में यह सवाल उठता है कि क्या हमारे देश में इतने महान साहित्यकारों की यह हालत होनी चाहिए? प्रेमचंद जैसे लेखक, जिन्होंने समाज की सच्चाई को अपनी कलम के माध्यम से दुनिया के सामने रखा, उन्हें क्यों अपनी आर्थिक स्थिति की चिंता करनी पड़ी?
लेखक यहां इस बात पर कटाक्ष करते हैं कि समाज अपने साहित्यकारों को तभी याद करता है जब उनकी रचनाओं को सराहा जाता है, लेकिन उनके जीवन संघर्षों की अनदेखी कर दी जाती है।
4. प्रेमचंद की सादगी और आत्मसम्मान:
प्रेमचंद की गरीबी के बावजूद, उन्होंने कभी किसी से सहायता नहीं मांगी। उनकी सादगी और आत्मसम्मान उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा थे। उन्होंने हमेशा अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना अपने दम पर किया। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से गरीबों, मजदूरों और किसानों की आवाज़ उठाई, लेकिन वे स्वयं उन परिस्थितियों से जूझ रहे थे।
प्रेमचंद ने अपनी गरीबी को कभी अपने कार्यों की कमजोरी नहीं बनने दिया। उनके फटे जूते इस बात का प्रतीक हैं कि उनका सच्चा धन उनकी साहित्यिक रचनाएँ थीं, न कि भौतिक संपत्तियाँ।
5. समाज की विफलता पर कटाक्ष:
परसाई जी ने समाज की उस विफलता पर जोर दिया है, जहां वह अपने महान साहित्यकारों की आर्थिक समस्याओं को अनदेखा कर देता है। यह रचना समाज के उस रवैये की आलोचना करती है, जिसमें वह साहित्यकारों के संघर्षों को नजरअंदाज कर देता है और केवल उनके काम की सराहना करता है।
6. निष्कर्ष:
"प्रेमचंद के फटे जूते" केवल प्रेमचंद के जीवन का चित्रण नहीं है, बल्कि यह समाज को आत्मचिंतन करने का मौका देता है। हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद की सादगी, आत्मसम्मान, और गरीबी को व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन यह रचना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने साहित्यकारों के संघर्षों को सही से समझ पाते हैं। प्रेमचंद का जीवन केवल साहित्यिक योगदान ही नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का संघर्ष है, जिसने अपने विचारों और सादगी के बल पर समाज को बदलने का प्रयास किया।
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 6 प्रेमचंद के फटे जूते (लेखक -हरिशंकर परसाई)
सी. बी. एस. सी. सिलेबस सोलुशन कक्षा 9 के लिए
क्षितिज भाग-1 ,गद्य खण्ड केसमस्त अध्याय के सार एवं प्रश्नोत्तर
CHAPTER 6 प्रेमचंद के फटे जूते (हरिशंकर परसाई) का सार
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
प्रश्न -१ -हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्रं हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के चित्रं सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं?
उत्तर-हरिशंकर परसाई ने अपनी व्यंग्य रचना "प्रेमचंद के फटे जूते" में प्रेमचंद का शब्दचित्र बेहद संवेदनशील और यथार्थवादी तरीके से प्रस्तुत किया है। इस रचना के माध्यम से प्रेमचंद की कुछ मुख्य विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं:
१. सादगी: परसाई जी ने प्रेमचंद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाया है, जो साधारण जीवन जीते थे। उनके फटे जूते इस बात का प्रतीक हैं कि उन्होंने कभी अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर कोई दिखावा नहीं किया। उनकी सादगी उनके जीवन और साहित्य दोनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।३. संघर्षशीलता: परसाई जी के इस चित्रण में प्रेमचंद की संघर्षशीलता भी उभरकर आती है। प्रेमचंद ने न केवल साहित्य के क्षेत्र में अपना योगदान दिया, बल्कि वे अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों से भी जूझते रहे। उन्होंने अपने जीवन को आर्थिक तंगी के बावजूद संघर्षमय लेकिन सम्मानपूर्वक जिया।
४. विचारशीलता और समाज के प्रति संवेदनशीलता: प्रेमचंद की रचनाओं में समाज के गरीब, मजदूर, और शोषित वर्ग की समस्याएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। उनके जूते इस बात का प्रतीक हैं कि वे न केवल लेखनी से समाज की स्थिति का वर्णन करते थे, बल्कि वे स्वयं भी उन कठिनाइयों का अनुभव कर रहे थे। परसाई ने इस पहलू को व्यंग्यात्मक तरीके से उभारते हुए यह दिखाया है कि प्रेमचंद खुद जिन परिस्थितियों का सामना कर रहे थे, उन्हीं का प्रतिबिंब उनकी रचनाओं में मिलता है।
प्रश्न-२-सही कथन के सामने (✓) का निशान लगाइए-
(क)बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अँगुली बाहर निकल आई है।
(ख)लोग तो इत्र चुपड़कर फ़ोटो खिंचाते हैं जिससे फ़ोटो में खुशबू आ जाए।
(ग)तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है।
(घ )जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो?
उत्तर-(क) ✔ (ख) ✔ (ग) ✖ (घ ) ✖
प्रश्न-३ -नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए-
(क) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं।(ख) तुम परदे का महत्त्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुरबान हो रहे हैं।
इसके विपरीत, लेखक अपने समय की सोच पर व्यंग्य करता है कि हम पर्दा रखने को गुण मानते हैं। जो व्यक्ति अपनी तकलीफों को छिपाकर समाज में खुश होने का नाटक करता है, उसे ही हम महान समझते हैं। जो अपनी गलतियों को छिपाकर खुद को श्रेष्ठ दिखाता है, उसी को हम उच्च स्थान देते हैं।
(ग) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ़ हाथ की नहीं, पाँव की अँगुली से इशारा करते हो?
प्रश्न-४-पाठ में एक जगह पर लेखक सोचता है कि ‘फ़ोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी?’ लेकिन अगले ही पल वह विचार बदलता है कि नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी।’ आपके अनुसार इस संदर्भ में प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती हैं?
उत्तर-लेखक हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद की सादगी को देखते हुए पहले सोचा कि अगर फोटो खिंचाने की पोशाक ऐसी है, तो पहनने की और कैसी होगी। लेकिन तुरंत यह विचार बदल गया, क्योंकि प्रेमचंद का जीवन सादगी से भरा था और उनके पास अलग-अलग पोशाकें नहीं हो सकती थीं। लेखक समझते हैं कि प्रेमचंद दिखावे से दूर थे और उनके जीवन में सच्चाई और सरलता थी। यही वजह है कि लेखक का यह विचार बदल जाता है कि प्रेमचंद के पास कोई विशेष या दिखावटी पोशाक नहीं होगी।
प्रश्न-५ -आपने यह व्यंग्य पढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बातें आकर्षित करती हैं?
उत्तर-इस व्यंग्य की सबसे खास बात मुझे इसकी विस्तार शैली लगती है। लेखक एक विचार से दूसरे विचार की ओर बड़ी सहजता से बढ़ते जाते हैं। जैसे छोटी-सी बूंद में समंदर ढूंढने की कोशिश होती है, वैसे ही यहाँ लेखक छोटे संदर्भ से बड़ी बात निकालते हैं। जिस तरह बीज से धीरे-धीरे अंकुर, पत्ते, पौधा और अंत में फूल-फल का विकास होता है, उसी तरह इस निबंध में प्रेमचंद के फटे जूते से शुरू होकर उनके पूरे व्यक्तित्व का चित्रण किया गया है। इस तरह बात से बात निकालने की शैली व्यंग्य को बेहद रोचक बनाती है।
प्रश्न-६ -पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग किन संदर्भो को इंगित करने के लिए किया गया होगा?
उत्तर-'टीला' शब्द राह में आने वाली रुकावट का प्रतीक है। जैसे रास्ते में टीला आ जाने पर उसे पार करने के लिए व्यक्ति को अतिरिक्त मेहनत और सावधानी बरतनी पड़ती है, वैसे ही समाज में छुआछूत, गरीबी, निरक्षरता और अंधविश्वास जैसी बुराइयाँ इंसान की प्रगति में बाधा डालती हैं। इन्हीं सामाजिक बुराइयों को दर्शाने के लिए 'टीला' शब्द का प्रयोग किया गया है, जो उन्नति के रास्ते में खड़ी होने वाली चुनौतियों का प्रतीक है।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न-७-प्रेमचंद के फटे जूते को आधार बनाकर परसाई जी ने यह व्यंग्य लिखा है। आप भी किसी व्यक्ति की पोशाक को आधार बनाकर एक व्यंग्य लिखिए।
उत्तर-मेरा मित्र रमेश आज बिल्कुल नए रूप में मेरे सामने खड़ा था। सफेद शर्ट, पीला सूट, और चमचमाते जूते—उसकी वेशभूषा देखकर मैं हैरान था। ऐसा नहीं था कि रमेश अमीर था, बल्कि उसकी आमदनी का हाल तो मैं जानता था—आधे महीने में ही जेब खाली हो जाती थी। पर आज तो वह किसी बड़ी कंपनी का मैनेजर लग रहा था। मैंने उससे पूछा, "यह सब कैसे हुआ?" उसने हंसते हुए कहा, "अरे भाई, आजकल दिखावे का जमाना है। कपड़े अच्छे हो तो लोग आपको बड़ा आदमी समझते हैं। फिर चाहे पेट में रोटी हो या न हो!"
वास्तव में, रमेश की पोशाक उसकी असलियत से मेल नहीं खा रही थी। यह व्यंग्य सिर्फ रमेश पर नहीं, बल्कि उन सभी लोगों पर था, जो अपनी आर्थिक स्थिति छिपाने के लिए महंगे कपड़ों का सहारा लेते हैं। उनकी असल जिंदगी चाहे कैसी भी हो, वे समाज में दिखावे के लिए चमक-धमक का नकाब पहन लेते हैं। रमेश का सूट, उसके जीवन की चुनौतियों को नहीं छिपा सकता था, पर समाज में उसकी यह नई छवि जरूर लोगों को प्रभावित कर रही थी। यही विडंबना है कि आजकल कपड़े पहचान बन गए हैं और इंसान की सच्चाई कहीं खो जाती है।
प्रश्न-८-आपकी दृष्टि में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है?
उत्तर-वेशभूषा को लेकर लोगों की सोच में काफी बदलाव आ गया है। अब कपड़ों को सामाजिक प्रतिष्ठा का मापदंड माना जाता है। जिनकी वेशभूषा आकर्षक और आधुनिक होती है, उन्हें अधिक सम्मान और महत्व मिलता है। कपड़ों से ही व्यक्ति का पहला प्रभाव बनता है, जबकि विचारों का असर बाद में होता है। आज के समय में अगर कोई व्यक्ति पार्टी में साधारण धोती-कुर्ता पहनकर जाए, तो उसे पिछड़ा समझा जाता है। कार्यालयों में भी कर्मचारी हमारी वेशभूषा के आधार पर व्यवहार करते हैं। इसी वजह से खासकर युवा वर्ग में आधुनिक और फैशनेबल दिखने की होड़ मची हुई है।
भाषा अध्ययन
प्रश्न-९ - पाठ में आए मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर -
हौसला पस्त करना – किसी का उत्साह या साहस खत्म करना।
वाक्य – भारत की तेज गेंदबाजी ने विरोधी टीम के हौसले पस्त कर दिए।
ठोकर मारना – कठिनाइयों का सामना करना।
वाक्य – सफलता पाने के लिए उसने जीवन में कई बार ठोकरें मारीं।
टीला खड़ा होना – रास्ते में रुकावटें आना।
वाक्य – उसकी पढ़ाई में हर कदम पर टीले खड़े हो जाते हैं, फिर भी वह हिम्मत नहीं हारता।
पहाड़ फोड़ना – बड़ी मुश्किलों को पार करना।
वाक्य – किसानों ने सूखे के बावजूद मेहनत करके पहाड़ फोड़ दिया और फसल तैयार की।
जंजीर होना – किसी बंधन में बँधना।
वाक्य – जब तक समाज की जंजीरें तोड़ी नहीं जातीं, तब तक सच्ची आज़ादी नहीं मिल सकती।
प्रश्न-१० -प्रेमचंद के व्यक्तित्व को उभारने के लिए लेखक ने जिन विशेषणों का उपयोग किया है उनकी सूची बनाइए।
उत्तर-प्रेमचंद का व्यक्तित्व उभारने के लिए लेखक ने जिन विशेषणों का प्रयोग किया है, वे हैं-
- जनता के लेखक
- महान कथाकार
- साहित्यिक पुरखे
- युग प्रवर्तक
- उपन्यास-सम्राट
