"NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 9 - रसखान के सवैये : भावार्थ और प्रश्नोत्तर"

 "NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 9: RASKHAN KE SAVAIYE: Explanation and Questions & Answers

                    रसखान के सवैये का भावार्थ 

👉मानुष हौं तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।

     जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥

      पाहन हौं तो वही गिरि को, जो धर्यो कर छत्र पुरंदर कारन।

      जौ खग हौं तो बसेरो करौं, मिलि कालिंदीकूल कदंब की डारन।।

भावार्थ-
        
         रसखान कहते हैं कि यदि वे मनुष्य के रूप में जन्म लें, तो वे ब्रज (वृंदावन) में गोकुल गाँव के किसी ग्वाले के रूप में ही जन्म लेना चाहेंगे। वे कृष्ण के साथ उस गाँव के ग्वालों की तरह रहना और उनके सान्निध्य का आनंद लेना चाहते हैं। यह उनके कृष्ण-प्रेम और भक्ति का प्रतीक है।

        अगर उनका जन्म पशु के रूप में हो, तो वे नंद बाबा के गौशाले में एक गाय के रूप में जन्म लेकर कृष्ण द्वारा रोज़ चराए जाने की इच्छा रखते हैं। इस तरह वे कृष्ण की सेवा और उनकी उपस्थिति में रह सकते हैं।

        अगर वे पत्थर बनकर जन्म लें, तो वे गोवर्धन पर्वत का पत्थर बनना चाहेंगे, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए अपनी छोटी अंगुली पर उठा लिया था। यह कृष्ण की शक्ति और उनकी कृपा का प्रतीक है, और रसखान इस पर्वत का हिस्सा बनकर भी उनके निकट रहना चाहते हैं।

     अगर वे पक्षी बनकर जन्म लें, तो वे यमुना नदी के किनारे स्थित कदंब के पेड़ की शाखाओं पर निवास करना चाहेंगे, जहाँ श्रीकृष्ण अपनी बांसुरी बजाते और गोपियों के साथ क्रीड़ा करते थे। इस प्रकार वे उस स्थान पर रहकर कृष्ण के दर्शन कर सकते हैं।


👉या लकुटी अरु कामरिया पर , राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।
     आठहुँ सिद्धि , नवौं निधि के सुख नंद की गाइ चराय बिसारौं॥
     रसखान कबौं इन आँखिन सौं , ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं।
     कोटिक ए कलधौत के धाम , करील के कुंजन ऊपर वारौं॥


भावार्थ-

रसखान जी इस सवैये में श्रीकृष्ण के प्रति अपनी गहरी भक्ति और प्रेम को व्यक्त कर रहे हैं। वे कहते हैं कि यदि कोई मुझे यह कहे कि या तो तुम श्रीकृष्ण की गायों को चराते हुए उनकी लाठी और कंबल ले लो, या फिर तीनों लोकों का राज ले लो, तो मैं बिना किसी संकोच के तीनों लोकों का राज छोड़ दूंगा और श्रीकृष्ण की लाठी और कंबल को अपने पास रखूंगा। इससे यह स्पष्ट होता है 

रसखान आगे कहते हैं कि जो सुख उन्हें नंद बाबा की गायों को चराते हुए मिलेगा, वह आठों सिद्धियों और नौ निधियों के सुख से भी कहीं अधिक होगा। उनका मानना है कि श्रीकृष्ण की सेवा और उनके साथ समय बिताने का जो आनंद है, वह किसी भी सांसारिक सुख या ऐश्वर्य से बड़ा है।

रसखान यह भी कहते हैं कि वे अपनी आँखों से सिर्फ ब्रज के जंगल, बाग और तालाब ही देखना चाहते हैं, क्योंकि यही वही स्थान हैं जहाँ श्रीकृष्ण की लीलाएँ होती हैं और जहां उनका मन रमण करता है। वे इन प्राकृतिक सौंदर्य से भरे स्थानों को देखकर खुश होते हैं, और इसके लिए वे अपने पूरे जीवन को सोने के महलों से भी अधिक मूल्यवान मानते हैं। इन स्थानों से उनका गहरा लगाव इस कारण है कि श्रीकृष्ण ने इन्हें अपनी उपस्थिति से पवित्र किया है और यही उनकी दिव्य लीलाओं के साक्षी हैं। 

इस प्रकार, रसखान जी अपनी गहरी भक्ति और कृष्ण के प्रति प्रेम में संसार की सभी भौतिक चीजों को तुच्छ मानते हैं और केवल श्रीकृष्ण के साथ रहने की इच्छा रखते हैं।

  

👉मोरपंखा सिर ऊपर राखिहौं , गुंज की माल गरें पहिरौंगी।
     ओढ़ि पितंबर लै लकुटी बन गोधन ग्वारनि संग फिरौंगी॥
     भावतो वोहि मेरो रसखानि सों तेरे कहे सब स्वांग करौंगी।
     या मुरली मुरलीधर की अधरान धरी अधरा न धरौंगी॥


भावार्थ-

     इस पंक्ति में रसखान ने कृष्ण के रूप की सुंदरता का वर्णन किया है, जिसे देखकर गोपियां पूरी तरह से आकर्षित हो जाती थीं। गोपियां श्री कृष्ण के हर रूप, उनके हर अंग, और उनके हर वस्त्र से प्रेम करती थीं। वे चाहती थीं कि वे हमेशा कृष्ण के साथ रहें और उनका रूप धारण करें। रसखान भी कृष्ण से गहरा प्रेम करते हैं और गोपियों की तरह ही उनका प्रेम कृष्ण से अभिन्न था। 

     यहाँ एक गोपी दूसरी गोपी से कहती है कि वह श्री कृष्ण के समान रूप धारण कर सकती है। वह अपने सिर पर मोरपंख रख सकती है, गले में गुंज (फूलों की माला) पहन सकती है, और पीले वस्त्र पहनकर अपने हाथ में लाठी लेकर ग्वालों और गायों के साथ जंगलों में घूम सकती है।

     लेकिन, गोपी आगे कहती है कि वह श्री कृष्ण की मुरली को अपने होठों पर नहीं रख सकती, क्योंकि वह मुरली हमेशा श्री कृष्ण के होठों से जुड़ी रहती थी। गोपियों का मानना था कि मुरली कृष्ण की प्रिय वस्तु थी, और वे इसे अपनी सौतन की तरह समझती थीं, इसलिए गोपियां मुरली को अपने होठों पर नहीं रखना चाहती थीं।


👉काननि दै अँगुरी रहिहौं , जबहीं मुरली धुनि मंद बजैहै।
      मोहनी तानन सों , अटा चढ़ि गोधुन गैहै तौ गैहै॥
      टेरि कहौं सिगरे ब्रजलोगनि , काल्हि कोई कितनो समुझैहै।
       माई री वा मुख की मुसकानि , सम्हारी न जैहै , न जैहै , न जै

भावार्थ-

इन पंक्तियों में रसखान जी श्रीकृष्ण की मोहक मुरली और मुस्कान का वर्णन कर रहे हैं, जो ब्रज की गोपियों को पूरी तरह से सम्मोहित कर लेती है। 

गोपियां कहती हैं कि जब श्रीकृष्ण धीरे-धीरे अपनी मुरली बजाते हैं, तो उस मधुर धुन को सुनने से खुद को रोकने के लिए वे अपने कानों में उंगलियां डाल लेती हैं, पर यह मोहिनी तान इतनी आकर्षक होती है कि वे खुद को रोक नहीं पातीं। जैसे ही मुरली की धुन गूंजती है, उनका मन बस उस धुन की ओर खिंचने लगता है, भले ही वे अपने सभी कार्य छोड़कर, अपनी सुध-बुध खोकर, गोधूलि के समय अपने गाय-बैलों को छोड़कर भी, कृष्ण की ओर दौड़ पड़ती हैं।

गोपियां ब्रजवासियों से कहती हैं कि चाहे कोई कितना भी समझाने की कोशिश करे, लेकिन कृष्ण की मुस्कान का जादू ऐसा है कि वे इसे संभाल नहीं सकतीं। यह मुस्कान इतनी मोहक है कि उसे देखकर वे अपने मन को वश में नहीं रख पातीं, और यह आकर्षण उनके लिए अद्वितीय और अटूट है।

"NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 9-RASKHAN KE SAVAIYE:Questions & Answers"

             रसखान के सवैये के प्रश्न उत्तर 

प्रश्न-१-ब्रजभूमि के प्रति कवि का प्रेम किन-किन रूपों में अभिव्यक्त हुआ है?

उत्तर -कवि का ब्रजभूमि से गहरा लगाव है। वह कहता है कि इस जन्म में ही नहीं, अगले जन्म में भी वह ब्रजभूमि में ही रहना चाहता है। भगवान उसे चाहे ग्वाला बना दें, चाहे गाय, पक्षी, या पत्थर बना दें, पर वह हर हाल में ब्रजभूमि में ही रहने की इच्छा रखता है। कवि ब्रजभूमि के पेड़ों, बगीचों, तालाबों और करील के कुंजों पर अपना सब कुछ न्योछावर करने को भी तैयार है।

प्रश्न-२-कवि का ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण हैं?

उत्तर-कवि ब्रज के जंगलों, बगीचों और तालाबों को इसलिए निहारता है क्योंकि इनसे उसे श्रीकृष्ण का सजीव संबंध महसूस होता है। वह श्रीकृष्ण का गहरा भक्त है। आराध्य से जुड़ी हर चीज़ उसे आत्मिक शांति और आनंद प्रदान करती है।

प्रश्न-३-एक लकुटी और कामरिया पर कवि सब कुछ न्योछावर करने को क्यों तैयार है?

उत्तर- कवि ब्रज के जंगलों, बगीचों और तालाबों को इसलिए निहारता है क्योंकि इनसे उसे श्रीकृष्ण का सजीव संबंध महसूस होता है। वह श्रीकृष्ण का गहरा भक्त है। आराध्य से जुड़ी हर चीज़ उसे आत्मिक शांति और आनंद प्रदान करती है।

प्रश्न-४-सखी ने गोपी से कृष्ण का कैसा रूप धारण करने का आग्रह किया था? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।

उत्तर-सखी ने गोपी से आग्रह किया था कि वह श्रीकृष्ण से ऐसा रूप धारण करने को कह रही है , जो सभी को आनंदित कर दे। वह चाहती थी कि कृष्ण ऐसा मोहक रूप अपनाएँ, जिसमें उनकी छवि और सुंदरता सबका मन मोह ले। इस रूप में उनके मुख पर विशेष चमक हो, उनके हाव-भाव मधुर हों और उनका हर कार्य प्रेम से भरा हो। सखी का मानना था कि इस रूप में कृष्ण अपने भक्तों के दिलों में और गहराई से स्थान बना लेंगे

प्रश्न-५-आपके विचार से कवि पशु, पक्षी और पहाड़ के रूप में भी कृष्ण का सान्निध्य क्यों प्राप्त करना चाहता है?

उत्तर-कवि पशु, पक्षी और पहाड़ के रूप में भी कृष्ण का सान्निध्य इसलिए प्राप्त करना चाहता है क्योंकि इन सभी के साथ श्रीकृष्ण का गहरा जुड़ाव रहा है। कवि इन रूपों में भी ब्रजभूमि में रहकर कृष्ण की लीलाओं और उनके प्रेम का अनुभव करना चाहता है।

प्रश्न-६-चौथे सवैये के अनुसार गोपियाँ अपने आप को क्यों विवश पाती हैं?

उत्तर - चौथे सवैये के अनुसार गोपियाँ अपने आप को विवश पाती हैं क्योंकि उनका प्रेम श्रीकृष्ण के प्रति इतना प्रगाढ़ और गहरा होता है कि वे कृष्ण के बिना अपने मन को नियंत्रित नहीं कर पातीं। उनका मन और हृदय हमेशा कृष्ण के प्रेम में बसा रहता है, और इस कारण वे अपने आप को कृष्ण के पास रहने के लिए मजबूर महसूस करती हैं।

प्रश्न-७-भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।

उत्तर -रसखान ब्रजभूमि से इतने गहरे प्रेम करते हैं कि वे वहाँ के काँटेदार करील के कुंजों के लिए करोड़ों महलों के सुखों को भी न्योछावर करने को तैयार हैं। उनका यह प्रेम इस बात को दर्शाता है कि ब्रजभूमि की सादगी, उसकी पवित्रता और वहाँ के कृष्ण प्रेम में बसा जो आनंद है, वह महलों की सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। वे महलों की भव्यता और ऐश्वर्य को त्यागकर भी उस भूमि पर रहना पसंद करते हैं, क्योंकि वहाँ कृष्ण का वास है और वह प्रेम के सर्वोच्च रूप को महसूस करते हैं।
(ख) माइ री वा मुख की मुसकानि सम्हारी न जैहै, न जैहै, न जैहै।

उत्तर-यह पंक्ति इस बात को व्यक्त करती है कि एक गोपी कृष्ण की मधुर और मोहक मुस्कान से इतनी प्रभावित है कि वह उससे अपने आप को रोक नहीं पाती। कृष्ण की मुस्कान की मोहकता ने उसे इस हद तक सम्मोहित कर लिया है कि वह उस पर पूरी तरह से समर्पित हो गई है। उसकी दिल से कृष्ण के प्रति यह मोह और आकर्षण इतना गहरा है कि वह खुद को कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह से खो देती है और उनकी मुस्कान के आगे सब कुछ भूल जाती है।

प्रश्न-८- कालिंदी कुल कदंब की डारन’ में कौन-सा अलंकार है?

उत्तर- "कालिंदी कुल कदंब की डारन" में "अनुप्रास अलंकार" का प्रयोग हुआ है।

 इस पंक्ति में "क" वर्ण की आवृत्ति है, जैसे "कालिंदी", "कुल", "कदंब" और "की" शब्दों में "क" का पुनः उपयोग हुआ है। इसलिए, यह अनुप्रास अलंकार का उदाहरण है।

प्रश्न-९-काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए

या मुरली मुरलीधर की अधरा न धरी अधरा न धरौंगी।।

उत्तर-इस पंक्ति में यमक अलंकार है, क्योंकि "मुरली मुरलीधर" और "अधरान" और "अधरा न" में ध्वनि की पुनरावृत्ति हो रही है। अनुप्रास अलंकार भी पाया जाता है, जैसे "अधरा न", "धरी", "धरौंगी" में 'अ' ध्वनि का पुनरावृत्ति है।

रचना और अभिव्यक्ति 

प्रश्न-१०-प्रस्तुत सवैयों में जिस प्रकार ब्रजभूमि के प्रति प्रेम अभिव्यक्त हुआ है, उसी तरह आप अपनी मातृभूमि के प्रति अपने मनोभावों को अभिव्यक्त कीजिए।

उत्तर-परीक्षा उपयोगी नहीं 

प्रश्न-११-रसखान के इन सवैयों का शिक्षक की सहायता से कक्षा में आदर्श वाचन कीजिए। साथ ही किन्हीं दो सवैयों को कंठस्थ कीजिए।

उत्तर-परीक्षा उपयोगी नहीं 

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