"NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 12: Megh Aaye: Explanation and Questions & Answers''
👉मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली ,
दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली ,
पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।
भावार्थ- कविता की इन पंक्ति का भावार्थ है कि कवि ने बादलों के आगमन को एक विशेष और आनंदमय घटना के रूप में चित्रित किया है और सभी लोग अपने घरों की खिड़कियों और दरवाजे खोल कर स्वागत में खड़े है जैसे गाँव में कोई खास पाहुन (अतिथि) शहर से आया हो, वैसे ही बादलों के आने पर हर तरफ स्वागत का भाव जागृत हो गया है।
कवि ने इस दृश्य के माध्यम से बादलों के आगमन को ग्रामीण जीवन में उत्सव के समान बताया है, जो प्रकृति के सौंदर्य और उसकी जीवनदायिनी शक्ति को उजागर करता है।
👉पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए,
आंधी चली, धूल भागी घाघरा उठाये,
बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूंघट सरके।
मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
भावार्थ- कवि ने इन पंक्तियों में बादलों के आने का बहुत ही सुंदर और जीवंत चित्रण किया है। बादलों के आगमन पर पेड़ ऐसे झुकते और गर्दन उचकाते हैं, जैसे उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हों। तेज आंधी चलने पर धूल इस तरह भागती है, मानो वह घाघरा उठाए दौड़ रही हो। नदी भी रुककर अपनी लहरों का घूंघट थोड़ा सरकाती है, जैसे कोई शर्मीली दुल्हन झिझकते हुए बादलों को देख रही हो।
इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के हर तत्व को जीवंत बना दिया है। पेड़, धूल, और नदी, सबके भीतर एक मानवीय चंचलता दिखाई देती है। यह वर्णन न केवल प्रकृति की सुंदरता को उजागर करता है, बल्कि उसमें छिपे आनंद और उत्साह को भी महसूस कराता है।
👉बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की,
‘बरस बाद सुधि लीन्हीं’ –
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की,
हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।
मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
भावार्थ-कवि ने इन पंक्तियों में बादलों के आगमन पर प्रकृति के भावनात्मक और मानवीय पक्ष को बहुत ही सुंदरता से प्रस्तुत किया है। जब बादल आते हैं, तो बूढ़ा पीपल अपने झुके हुए स्वरूप में मानो आदरपूर्वक झुककर उनका अभिवादन करता है और ऐसा प्रतीत होता है जैसे कह रहा हो, "बरसों बाद तुमने हमारी सुध ली।"
लता, जो किवार (दरवाजे) की ओट में छिपी हुई है, घबराहट और खुशी के मिश्रित भाव से झिझकती हुई बादलों का स्वागत करती है। तालाब भी खुश होकर अपनी पानी से भरी परात (पानी रखने का बर्तन) लेकर मानो बादलों के स्वागत के लिए तैयार खड़ा हो जाता है।
कुल मिलाकर, कवि ने प्रकृति के तत्वों को मानवीय भावनाओं से जोड़ते हुए यह चित्रण किया है कि बादलों के आगमन से पूरा वातावरण आनंद और स्वागत के भाव से भर उठता है।
👉क्षितिज अटारी गहराई दामिनी दमकी,
‘क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की’,
बाँध टूटा झर-झर मिलन के अश्रु ढरके।
मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
भावार्थ-कवि ने इन पंक्तियों में बादलों के आगमन को अत्यधिक सुंदर और गहन भावनाओं से ओतप्रोत तरीके से प्रस्तुत किया है। क्षितिज की अटारी (क्षितिज को ऊँचाई पर स्थित स्थान के रूप में दर्शाते हुए) गहरी हो गई, और आकाश में बिजली चमक उठी। यह बिजली मानो यह कह रही हो, "क्षमा करो, अब भ्रम का पर्दा हट गया है।"
बादलों के आने से मानो वर्षों का इंतजार समाप्त हो गया, और धरती तथा आकाश के बीच पुनर्मिलन के अश्रु (आंसू) झर-झर बहने लगे। यह दृश्य ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रकृति अपने प्रिय बादलों के लौटने से भावविभोर होकर रो पड़ी हो।
इस भावार्थ में कवि ने धरती, आकाश, और बिजली को एक भावनात्मक रूप में प्रस्तुत किया है, जहाँ बादलों के आगमन से प्रकृति का हर तत्व खुशी और संतोष से भर जाता है।
"NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 12: Megh Aaye: Questions & Answers''
मेघ आए कविता के प्रश्नोत्तर
प्रश्न-१-बादलों के आने पर प्रकृति में जिन गतिशील क्रियाओं को कवि ने चित्रित किया है।उन्हें लिखिए ?
उत्तर-बादलों के आने पर कवि ने प्रकृति में होने वाली हलचल का सरल और सुंदर वर्णन किया है। हवा नाचती-गाती हुई चलती है, मानो बादलों का स्वागत कर रही हो। गाँव के लोग अपने घरों की खिड़कियाँ और दरवाजे खोल देते हैं, जैसे किसी खास मेहमान के आने पर उत्साह से भरे हों। पेड़ अपनी टहनियों को झुकाकर और उठाकर बादलों को देखने की कोशिश कर रहे हैं। धूल को कवि ने एक लड़की के रूप में दिखाया है, जो अपना घाघरा उठाकर दौड़ रही हो, मानो बादलों के आने की खबर दे रही हो। नदी भी रुककर अपनी लहरों से घूंघट सरकाती है और लाजभरी नजरों से बादलों को देखती है। बूढ़ा पीपल झुककर बादलों को प्रणाम करता है। बिजली चमककर अपने भ्रम के टूटने की बात करती है, और पानी खुशी के आंसुओं की तरह बहने लगता है। इस तरह, कवि ने बादलों के आने से प्रकृति में उत्सव जैसा माहौल दिखाया है।
प्रश्न-२-निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं ?
धूल , पेड़ , नदी , लता , तालाब।
उत्तर-इन शब्दों के माध्यम से कवि ने प्रकृति के विभिन्न तत्वों को मानवीय भावनाओं और ग्रामीण जीवन के प्रतीक रूप में प्रस्तुत किया है:
- धूल: यह गाँव की चंचल बालिका का प्रतीक है, जो घाघरा उठाकर मेहमान के आने की सूचना पूरे गाँव में प्रसारित करती है।
- पेड़: यह गाँव के बुजुर्गों का प्रतीक है, जो झुककर और गरदन उचकाकर अपने अतिथियों का स्वागत करते हैं।
- नदी: यह लजाई हुई नववधू का प्रतीक है, जो मेहमानों को देखने के लिए ठिठककर और घूंघट सरकाकर उत्सुकता से झांकती है।
- लता: यह गाँव की अकुलाई हुई महिला का प्रतीक है, जो मेहमान के स्वागत में अपनी प्रसन्नता और उत्साह को प्रकट करती है।
- तालाब: यह प्रसन्नता और सेवा-भाव का प्रतीक है, जो अतिथि के स्वागत में अपने जल रूपी परात को प्रस्तुत करता है।
- लता ने बादल रूपी मेहमान को अकुलाकर और उत्सुकता भरी दृष्टि से देखा। यह ऐसा प्रतीत होता है मानो वह अपनी प्रसन्नता को छिपाते हुए दरवाजे की ओट से झाँक रही हो। लता का यह व्यवहार मेहमान के प्रति उसके आदर और प्रेम को दर्शाता है। वह अपने मन की उमंग और खुशी को रोक नहीं पाती और इस रूप में अपनी भावनाओं को व्यक्त करती है। यह दृश्य मानवीय भावनाओं और प्रकृति के सुंदर सामंजस्य को दर्शाता है।
प्रश्न-४-भाव स्पष्ट कीजिये।
(क)क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की
उत्तर-"क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की" पंक्ति का मतलब है कि बादलों के आने से पहले जो भी शंका या असमंजस था, वह अब खत्म हो गया है।
कवि कहना चाहते हैं कि लंबे समय से बारिश का इंतजार था, और इस इंतजार ने मन में कई तरह की आशंकाएँ भर दी थीं। लेकिन जैसे ही बादल आए, सब कुछ साफ हो गया और खुशियों का माहौल बन गया। यह पंक्ति बताती है कि बादलों के आगमन से सबका मन शांत और संतुष्ट हो गया।
(ख)बाँकी चितवन उठा , नदी ठिठकी , पूँघट सरके।
उत्तर-"बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूंघट सरके" पंक्ति का मतलब है कि बादलों के आने पर नदी में हलचल होने लगी। कवि को ऐसा लगा जैसे कोई नई दुल्हन अपनी तिरछी नजरों से बादलों की ओर देख रही हो। 'नदी ठिठकी' का मतलब है कि नदी रुक-सी गई, और 'घूंघट सरके' का मतलब है कि वह लाज से अपना घूंघट थोड़ा हटा कर बादलों को देखने लगी। यह पंक्ति प्रकृति की सुंदरता और उसकी भावनाओं को सरलता से दिखाती है।
प्रश्न-५-मेध रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए ?
उत्तर-जब बादल आए, तो वातावरण में बहुत सारे बदलाव हुए। बयार (हवा) खुश होकर चलने लगी, जैसे वह नाच रही हो। पेड़ झुककर मानो बादलों का स्वागत कर रहे थे। धूल भी हवा के साथ तेज़ी से इधर-उधर भागने लगी, जैसे वह खुशी से दौड़ रही हो। नदी थोड़ी रुककर, घूंघट हटा कर, बादलों को देख रही थी। तालाब में पानी भी लहराने लगा, जैसे वह खुशी से झूम रहा हो। पूरी प्रकृति खुशी और उमंग से भर गई, जैसे सभी ने मिलकर बादलों का स्वागत किया हो।
प्रश्न-६-मेघों के लिए “बन-ठने के , सँवर के” आने की बात क्यों कही गई है ?
उत्तर-कविता में "बन-ठने के, सँवर के" शब्दों का इस्तेमाल इस बात को बताने के लिए किया गया है कि मेघ (बादल) बहुत ही आकर्षक और सुंदर रूप में आते हैं, जैसे कोई व्यक्ति सज-धज कर किसी खास अवसर पर आता है। यहाँ पर बादल को एक सुंदर और विशेष मेहमान की तरह चित्रित किया गया है, जो अपना आगमन बहुत ही सजे-संवरे तरीके से करता है। इस दृश्य से मेघों के आगमन को एक उत्सव की तरह दिखाया गया है, जिससे वातावरण में आनंद और उमंग का अनुभव होता है।
प्रश्न-७-कविता में आए मानवीकरण तथा रूपक अलंकार के उदाहरण खोजकर लिखिए।
उत्तर-कविता में मानवीकरण और रूपक अलंकार के उदाहरण दिए गए हैं:
मानवीकरण अलंकार:
- "मेघ आए बड़े बन-ठने के सँवर के" – बादलों को सज-धज कर आए मेहमान के रूप में दिखाया गया है।
- "आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली" – हवा को नाचती-गाती लड़की के रूप में दिखाया गया है।
- "पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए" – पेड़ों को गाँव के लोगों की तरह दिखाया गया है।
- "हरसाया ताल लाया पानी परात भर के" – तालाब को एक सेवक की तरह दिखाया गया है।
- "आंधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए" – आंधी को स्त्री के रूप में दिखाया गया है।
- "बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूंघट सरके" – नदी को बहू के रूप में दिखाया गया है।
- "बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की" – पीपल के पेड़ को बुजुर्ग व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है।
- "बोली अकुलाई लता, ओट हो किवार की" – लता को घर की बेटी के रूप में दिखाया गया है।
रूपक अलंकार:
- "क्षितिज अटारी" – “क्षितिज” को “अटारी” के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- "दामिनी दमकी" – “दामिनी” (बिजली) की चमक को दमकने के रूप में रूपक में दिखाया गया है।
- "बाँध टूटा झर-झर मिलन के अश्रु ढरके" – “झर-झर मिलन के अश्रु” की तुलना बारिश से की गई है।
प्रश्न-८-कविता में जिन रीति-रिवाजों का मार्मिक चित्रण हुआ है, उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर-कविता में गॉँव के सामान्य जीवन के रीति-रिवाजों का बहुत सुंदर चित्रण किया गया है। जब गांव में कोई मेहमान आता है, तो सभी लोग उसे सम्मान देते हैं। इस बात को कविता में ऐसे दिखाया गया है जैसे प्रकृति के सभी तत्व भी बादलों के आगमन का स्वागत करते हैं। पेड़ अपनी शाखाएं झुकाकर, जैसे गांव के लोग अपना सिर झुका कर मेहमान का स्वागत करते हैं। हवा, जो नाचती-गाती चल रही है, उसे एक गांव की किशोरी की तरह दिखाया गया है, जो खुशी से मेहमान का स्वागत कर रही है। इसी तरह, तालाब का पानी लाना और नदी का घूंघट सरकाना, ये सब पारंपरिक रीति-रिवाजों के प्रतीक हैं, जो गांव में किसी खास मेहमान के आने पर होते हैं।
कविता में आंधी को भी एक गांव की महिला की तरह दिखाया गया है, जो घाघरा उठाए तेजी से दौड़ रही हो। इसके अलावा, लता और पीपल का मानवीकरण किया गया है, जैसे वे घर की बेटी और गांव के बुजुर्ग के रूप में दिखाए गए हैं। इस तरह से कविता में प्रकृति और गांव के रीति-रिवाजों को जोड़कर एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया गया है, जिसमें मेहमान के सम्मान और स्वागत की भावनाओं को बहुत प्रभावी तरीके से व्यक्त किया गया है।
प्रश्न-९-कविता में कवि ने आकाश में बादल और गाँव में मेहमान (दामाद) के आने का जो रोचक वर्णन किया है। उसे लिखिए ?
उत्तर-कविता में कवि ने आकाश में बादल और गाँव में मेहमान (दामाद) के आने का रोचक वर्णन किया है। वह बादल को एक विशेष मेहमान के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जैसे वह सज-धज कर, पूरी तैयारी के साथ गाँव में आए हों। कविता में हवा नाचती-गाती हुई चल रही है, जिससे यह अहसास होता है कि यह एक खुशी का समय है। पेड़ अपने सिर झुका कर, जैसे कोई गांववासी अपने दामाद का स्वागत करता है। आंधी तेज़ चल रही है और धूल घाघरा उठाए दौड़ती हुई जा रही है, यह दर्शाता है कि वातावरण में उमंग और हर्ष का माहौल है। तालाब अपना पानी लाकर मेहमान का स्वागत करता है, जबकि नदी का घूंघट भी सरकता है, जैसे वह शर्मीली नववधू हो, जो अपने दामाद को निहार रही हो।
इस प्रकार कवि ने बादल और दामाद के आगमन को एक ही दृष्टिकोण से चित्रित किया है, जो गाँव के रीति-रिवाजों और प्रकृति के सौंदर्य को एक साथ जोड़ता है। और यह वर्णन एक उत्सव और स्वागत के भाव को व्यक्त करता है।
प्रश्न-१०-काव्य सौंदर्य लिखिए
(क)पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।1.उत्प्रेक्षा अलंकार:
"पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के" में उत्प्रेक्षा अलंकार है, क्योंकि बादलों की तुलना गाँव में आए हुए शहरी मेहमानों से की गई है।
2.अनुप्रास अलंकार:
"बड़े बन-ठन के" में अनुप्रास अलंकार है, क्योंकि 'ब' ध्वनि की आवृत्ति से संगीतात्मक प्रभाव उत्पन्न होता है।
3.मानवीकरण:
"मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के" में मेघों का मानवीकरण किया गया है, जिससे बादलों को सजधज और सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
4.भाषा:
भाषा सरल और सहज है। इसमें ग्रामीण और साधारण बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया गया है, जोपाठकों को सहजता से जोड़ता है।
5.तुकांतता:
कविता तुकांतयुक्त है, जो इसे पढ़ने में मधुर और लयबद्ध बनाती है।
इस प्रकार, यह पंक्ति प्राकृतिक सौंदर्य और मानवीय भावनाओं का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न-११-वर्षा के आने पर अपने आसपास के वातावरण में हुए परिवर्तनों को ध्यान से देखकर एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर-वर्षा के आगमन के साथ ही पूरा वातावरण एक नई ताजगी और सजीवता से भर जाता है। आसमान में काले बादल उमड़-घुमड़कर छा जाते हैं और बारिश की पहली बूंदें धरती पर गिरते ही सोंधी महक का आनंद दिलाती हैं। पेड़-पौधे जो गर्मी के कारण मुरझाए से लगते थे, अब हरे-भरे होकर झूमने लगते हैं। खेतों में हरियाली छा जाती है और किसान अपने कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं। पक्षियों की चहचहाहट और मोरों का नृत्य पूरे वातावरण को सुरम्य बना देता है।
सड़कें गीली हो जाती हैं और नालों में पानी बहने लगता है। बच्चे बारिश में खेलते हुए उत्साह से भर जाते हैं, जबकि बड़े छतरियों और रेनकोट का सहारा लेते हैं। तालाब और झीलें पानी से भर जाती हैं और उनका सौंदर्य बढ़ जाता है। गर्मी से परेशान लोगों को ठंडक और राहत मिलती है।
प्रश्न-१२-कवि ने पीपल को ही बड़ा बुजुर्ग क्यों कहा है? पता लगाइए।
उत्तर-कवि ने पीपल को बड़ा बुजुर्ग इसलिए कहा है क्योंकि यह दीर्घायु, सहनशीलता और परोपकार का प्रतीक है। यह हर मौसम में हरा-भरा रहता है, शुद्ध हवा और छाया प्रदान करता है। धार्मिक रूप से भी इसे पवित्र मानकर पूजा जाता है, जिससे यह सम्मान का पात्र बनता है।
प्रश्न-१३-कविता में मेघ को ‘पाहुन’ के रूप में चित्रित किया गया है। हमारे यहाँ अतिथि (दामाद) को विशेष महत्त्व प्राप्त है, लेकिन आज इस परंपरा में परिवर्तन आया है। आपको इसके क्या करण नज़र आते हैं। लिखिए ?
उत्तर-अतिथि, विशेष रूप से दामाद, को हमारे समाज में परंपरागत रूप से विशेष सम्मान दिया जाता था क्योंकि वह परिवार का मान-सम्मान बढ़ाने वाला माना जाता था। परंतु आज इस परंपरा में बदलाव आया है। इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली और सामाजिक दृष्टिकोण है।
पहले संयुक्त परिवार प्रचलित थे, जहां सभी सदस्य एक-दूसरे के साथ गहरे जुड़ाव में रहते थे। परंतु आज एकल परिवार अधिक हो गए हैं, जिससे संबंधों में औपचारिकता बढ़ गई है। इसके अलावा, आधुनिक जीवन में समय की कमी और व्यस्तता ने भी इस परंपरा को प्रभावित किया है।
समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बढ़ते विचारों के कारण रिश्तों में पारंपरिक भूमिका और अपेक्षाओं का महत्व कम हो गया है। अब दामाद को भी परिवार का सामान्य सदस्य माना जाता है, जिससे अतिशय आदर की आवश्यकता कम हो गई है।
भाषा अध्ययन -
प्रश्न-१४-कविता में आए मुहावरों को छाँटकर अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।
उत्तर-१. बन-ठन के (पूरी तैयारी के साथ):मोहन जब भी कहीं जाता है, हमेशा बड़े बन-ठन के जाता है।
२. सुधि लेना (खैर-खबर लेना):शहर जाने के बाद रमेश ने अपने माता-पिता की सुधि भी नहीं ली।
१. पाहुन – अतिथि या मेहमान
२. बयार – हवा
३. उचकना – उत्साह से ऊपर उठना
४. सुधि-लीन्हीं – खैर-खबर लेना
५. अटारी – ऊपरी मंजिल या छत
६. परात – बड़ा बर्तन
७.जुहार – नमस्ते या अभिवादन
८. किवाड़ – दरवाजा
प्रश्न-१६-मेघ आए कविता की भाषा सरल और सहज है। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर-"मेघ आए" कविता की भाषा सरल और सहज है, जिसे समझना पाठकों के लिए आसान है। कवि ने ग्रामीण और आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है, जो कविता को स्वाभाविक और सजीव बनाती है।
+उदाहरण:
- पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के – इसमें 'पाहुन' शब्द का प्रयोग ग्रामीण परिवेश की सहजता को दर्शाता है।
- बड़े बन-ठन के, सँवर के – यहाँ 'बन-ठन' और 'सँवर' जैसे शब्द सरल और बोलचाल के हैं, जो सहजता को बनाए रखते हैं।
- सुधि-लीन्हीं – यह शब्द कविता को ग्रामीण सांस्कृतिक स्पर्श देता है।
इन शब्दों और सरल शैली के कारण कविता का सौंदर्य बढ़ जाता है और पाठक इसे आसानी से महसूस कर पाते हैं।
