"NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 10: kaidi aur kokila: Explanation and Questions & Answers
कैदी और कोकिला का भावार्थ
कोकिल बोलो तो !
क्या लाती हो ?
सन्देश किसका है ?
कोकिल बोलो तो !
👉ऊँची काली दीवारों के घेरे में
डाकू, चोरों, बटमारों के डेरे में
जीने को देते नहीं पेट भर खाना
जीवन पर अब दिन रात कड़ा पहरा है
शासन है , या तम का प्रभाव गहरा है ?
हिमकर निराश कर चला रात भी काली
इस समय कालिमामयी क्यूँ आली ?
भावार्थ-कवि माखनलाल चतुर्वेदी अपनी कविता में स्वतंत्रता सेनानियों की पीड़ा और ब्रिटिश शासन की अमानवीयता का मार्मिक चित्रण करते हैं। वे बताते हैं कि स्वतंत्रता सेनानियों को जेल की ऊंची और अंधेरी दीवारों के भीतर अपराधियों, चोरों और लुटेरों के साथ रखा गया है। वहाँ पर उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिया जाता और हर समय उनके ऊपर अंग्रेजों की सख्त निगरानी रहती है।
कवि ब्रिटिश शासन की तुलना अंधकार से करते हैं, क्योंकि उनका शासन अन्याय और अत्याचार से भरा हुआ था, जहाँ केवल बुराइयाँ पनपती थीं। कवि कहते हैं कि अब तो चाँद की थोड़ी-सी रोशनी भी उनका साथ छोड़ चुकी है, जिससे अंधकार और गहरा हो गया है। इस निराशा में, कवि एक कोयल से प्रश्न करते हैं कि वह इस घोर अंधकार में क्यों जाग रही है। यह उनकी हताशा और आशा के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।
👉क्यों हूक पड़ी ?
वेदना बोझ वाली सी
कोकिल बोलो तो
क्या लुटा ?
मृदुल वैभव की रखवाली सी
कोकिल बोलो तो !
भावार्थ- इन पंक्तियों में कवि कोयल से पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि उसकी मधुर ध्वनि में दर्द और वेदना झलकने लगी है। वह वेदना को "बोझ वाली" बताते हैं, जो किसी बड़े नुकसान या गहरे दुख का प्रतीक है।
कवि यह जानना चाहते हैं कि ऐसा क्या मूल्यवान खो गया, जिसकी वह रखवाली कर रही थी। उनकी चिंता इस बात पर है कि कोयल के स्वर में जो पहले कोमलता और वैभव था, वह अब समाप्त क्यों हो गया है। ये पंक्तियाँ मानव जीवन के दर्द और हानि की ओर संकेत करती हैं, जिसमें कोयल के माध्यम से भावनाओं को व्यक्त किया गया है।
👉 क्या हुई बावली ?
अर्ध रात्रि को चीखी कोकिल बोलो तो !
किस दावानल की ज्वालायें हैं दीखी ?
कोकिल बोलो तो !
भावार्थ- कविता की इन पंक्तियों में कवि कोयल से सवाल करते हैं कि आधी रात को उसे क्या हुआ, जो वह दर्दभरी चीख निकालने लगी। कवि उससे यह जानना चाहते हैं कि उसकी इस करुण पुकार के पीछे कौन-सी विपत्ति या संकट है।
कवि आगे पूछते हैं कि क्या उसने किसी बड़े विनाशकारी अग्निकांड (दावानल) को देखा है, जिसकी ज्वालाएँ उसकी चीख का कारण बनी हैं। यह भावार्थ उन आंतरिक और बाहरी संघर्षों की ओर संकेत करता है, जो मानव मन को आहत करते हैं और जिन्हें कवि कोयल की चीख के रूप में महसूस करते हैं।
👉क्या ? देख न सकती जंजीरों का गहना ?
हथकड़ियाँ क्यों ? ये ब्रिटिश राज का गहना।
कोल्हू का चर्रक चूं जीवन की तान।
गिट्टी पर अंगुलियों ने लिखे गान !
हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जूआ
खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कूआ
दिन में करुणा क्यों जगे, रुलानेवाली
इसलिए रात में गजब ढ़ा रही आली ?
भावार्थ-कविता की इन पंक्तियों में कवि ने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण व्यवहार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को भावुकता और प्रतीकात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत किया है। कवि कोयल को संबोधित करते हुए कहते हैं कि क्या वह उनकी हथकड़ियों को देख सकती है, जिन्हें ब्रिटिश शासन ने उनके लिए मानो गहनों के रूप में पहना दिया है। इन लोहे की जंजीरों को कवि ने शोषण और यातना का प्रतीक बताया है, लेकिन इन जंजीरों को पहनना, स्वतंत्रता सेनानियों के लिए गर्व और त्याग का प्रतीक बन गया है।
कवि जेल में अपनी कठिन दिनचर्या का वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि कोल्हू की चरमराहट अब उनके जीवन का संगीत बन गई है, और बड़े पत्थरों को तोड़कर बनाई गई गिट्टियों पर उनके संघर्ष की कहानियां लिखी जा चुकी हैं। वे कहते हैं कि उनके पेट पर बंधा जुआ उन्हें कुएं से पानी खींचने के लिए मजबूर करता है, लेकिन उनका यह कार्य अंग्रेजों के अहंकार और शासन को धीरे-धीरे खत्म करने की ओर इशारा करता है।
कवि कोयल को अपनी सखी मानते हैं और पूछते हैं कि वह दिन में क्यों नहीं गाती। वे इस संभावना की ओर इशारा करते हैं कि कोयल शायद दिन में अपनी वेदना प्रकट करने से बचती है, ताकि वह कवि और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को कमजोर न कर दे। रात के अंधेरे में उसकी आवाज जैसे ढांढस बंधाने और प्रेरणा देने के लिए आती है।
👉 इस शांत समय में ,
अंधकार को बेध , रो रही हो क्यों ?
कोकिल बोलो तो !
चुप चाप मधुर विद्रोह बीज ,
इस भाँति बो रही हो क्यों ?
कोकिल बोलो तो !
भावार्थ-कविता के इस खंड कवि कोकिल (कोयल) से पूछ रहा है कि इस शांत और अंधकारमय समय में वह क्यों रो रही है। और कोकिल की आवाज़ में एक प्रकार का विद्रोह और दर्द है, जो मानो किसी गहरे दुःख या विरोध का प्रतीक है। कवि उससे यह जानना चाहता है कि वह चुपचाप विद्रोह का बीज क्यों बो रही है।
यह कविता कोकिल की करुणा भरी आवाज़ के माध्यम से समाज के अंदर छुपे संघर्षों और विरोध को व्यक्त करती है। कोयल की इस मधुर लेकिन करुण आवाज़ को कवि एक प्रतीक मानता है, जो अंधकार के समय में भी अपनी बात कहने का साहस कर रही है।
कवि कोयल से पूछते हैं कि हे सखी !! इस सन्नाटे वाली काली अंधेरी रात के अंधकार को भेदकर (चीरना) तुम क्यों रो रही हो ? यानि तुम्हारा इस समय बोलना इस शांत अंधेरी रात के सन्नाटे को भेद रहा हैं। कोयल कहीं तुम , इन सोए हुए लोगों को जगा कर , उनके मन में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के बीज़ तो नहीं बो रही हो है। कोयल कुछ तो बोलो।
शासन की करनी भी काली ,
काली लहर कल्पना काली ,
मेरी काल कोठरी काली ,
टोपी काली, कमली काली ,
मेरी लौह श्रृंखला काली ,
पहरे की हुंकृति की व्याली
भावार्थ-इस कविता के खंड में कवि का मन इस तरह से व्यथित है कि कवि को आपने चारों ओर केवल अंधकार और दमन दिखाई दे रहा है। वह कहता है कि ऐ कोयल जिस तरह तुम काली हो ठीक वैसे ही रात भी काली है, शासन की नीतियां भी अंधकारमय और अन्यायपूर्ण हैं। उसकी कल्पनाएं और सपने भी इस कालेपन से घिर गए हैं। उसकी काल कोठरी, जहां वह खुद को बंद पाता है, और उसकी बेड़ियां भी काली हैं, जो उसकी स्वतंत्रता को छीन रही हैं। यहां तक कि समाज और व्यवस्था से जुड़े प्रतीक, जैसे टोपी और कमली (ओढ़ने का वस्त्र), सब कुछ काले रंग का प्रतीक बन गए हैं।
पहरेदारों की धमकी भरी आवाज़ उसे और अधिक भयभीत करती है, मानो यह अंधकार और दमन उसे हर ओर से घेर रहा हो।
👉 इस काले संकट सागर पर
मरने की , मदमाती !
कोकिल बोलो तो !
अपने चमकीले गीतों को
क्योंकर हो तैराती !
कोकिल बोलो तो !
भावार्थ-कवि कोकिल (कोयल) से पूछता है कि इस अंधकारमय संकट के सागर पर वह क्यों अपने जीवन को जोखिम में डाल रही है। कवि उसकी मधुर और ऊर्जावान आवाज़ को "चमकीले गीतों" के रूप में देखता है और जानना चाहता है कि वह इन गीतों के माध्यम से अंधकार के सागर में तैरने का प्रयास क्यों कर रही है।
यह भाव इस बात को दर्शाता है कि कोयल, अपने गीतों के जरिए, कठिन परिस्थितियों और संकट के समय में भी आशा और साहस का संदेश दे रही है। यह उसकी अदम्य आत्मा और संघर्ष की भावना को उजागर करता है।
👉तुझे मिली हरियाली डाली
मुझे मिली कोठरी काली !
तेरा नभ भर में संचार
मेरा दस फुट का संसार !
तेरे गीत कहावें वाह
रोना भी है मुझे गुनाह !
देख विषमता तेरी मेरी
बजा रही तिस पर रणभेरी !
भावार्थ-कवि अपने जीवन और कोयल के जीवन के बीच के अंतर को दर्शा रहा है। वह कहता है। कि हे कोयल तुम को हरी-भरी डालियां मिली हैं, जबकिमुझे (कवि )को अंधेरी काल कोठरी में रहना पड़ता है। कोयल का जीवन खुला और स्वतंत्र है, वह खुले आसमान में उड़ सकती है, जबकि कवि का संसार मात्र दस फुट के दायरे में सीमित है।
कोयल के मधुर गीतों की प्रशंसा होती है, लेकिन कवि के लिए अपने दर्द को व्यक्त करना भी मानो अपराध है। इस असमानता और अन्याय को देखकर कवि विद्रोह का बिगुल बजाने की बात करता है, जो जीवन में बदलाव और संघर्ष का प्रतीक है।
"NCERT Solutions for class 9 hindi Kshitiz Chapter 10-Kaidi aur Kokila:Questions & Answers"
प्रश्न-१ -कोयल की कूक सुनकर कवि की क्या प्रतिक्रिया थी ?
उत्तर-कोयल की कूक सुनकर कवि की प्रतिक्रिया करुणा और प्रश्नों से भरी हुई थी। कवि को कोयल की आवाज में एक मधुरता के साथ-साथ दर्द और विद्रोह का भाव भी महसूस हुआ। उसने कोयल से पूछा कि वह अंधकार और संकट के इस समय में क्यों रो रही है और क्यों अपने गीतों के माध्यम से इस अंधकार को चुनौती दे रही है। कवि को कोयल की कूक में संघर्ष और आशा का संदेश सुनाई दिया, जो उसे गहराई से प्रभावित करता है।
उत्तर-कवि ने कोकिल के बोलने के पीछे कई संभावनाओं का अनुमान लगाया। उसने सोचा कि:
- करुणा और दुःख: कोकिल अपने भीतर छिपे दर्द और करुणा को व्यक्त कर रही हो।
- विद्रोह का संकेत: कोकिल अपनी कूक के माध्यम से अंधकार और अन्याय के खिलाफ विद्रोह का संकेत दे रही हो।
- संकट का सामना: वह संकट के समय में भी अपने मधुर गीतों के माध्यम से साहस और संघर्ष का परिचय दे रही हो।
- आशा का संदेश: कोकिल अपनी कूक के जरिए निराशा के बीच आशा और जीवन का संदेश देना चाह रही हो।
कवि को कोकिल के बोलने में जीवन के संघर्ष और आत्मा की अडिग शक्ति का प्रतीक नजर आता है।
प्रश्न-३ -किस शासन की तुलना तम के प्रभाव से की गई है और क्यों ?
उत्तर-कवि ने उस शासन की तुलना अंधकार (तम) से की है जो अन्यायपूर्ण और दमनकारी है।क्योकि यह शासन स्वतंत्रता छीनकर समाज में भय और निराशा फैलाता है। इसकी नीतियां अन्याय और असमानता को बढ़ावा देती हैं, जिससे जीवन से आशा और उजाला गायब हो जाता है।
प्रश्न-४-कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों में दी जाने वाली यंत्रणाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों में कैदियों को अंधेरी और अस्वास्थ्यकर काल कोठरियों में रखा जाता था, जहां प्रकाश और ताजी हवा का अभाव था। उन्हें लोहे की भारी जंजीरों से बांधकर रखा जाता था, जो उनके शरीर पर गहरे घाव कर देती थीं। पहरेदारों की धमकी भरी आवाजें और कठोर निगरानी कैदियों के मनोबल को तोड़ने का काम करती थीं। जेल के सीमित दायरे और कठोर नियमों ने कैदियों को मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर करने का प्रयास किया। यह स्वतंत्रता सेनानियों को झेलनी पड़ी कठोर यातनाओं को दर्शाता है।
प्रश्न-५-भाव स्पष्ट कीजिये
(क)मृदुल वैभव की रखवाली-सी , कोकिल बोलो तो !
उत्तर-"मृदुल वैभव की रखवाली-सी, कोकिल बोलो तो!" पंक्ति में कवि को कोयल की कूक में सौंदर्य, कोमलता, और वैभव का प्रतीक नजर आता है। कोयल की मधुर आवाज मानो प्रकृति के कोमल वैभव और उसकी सुंदरता की रक्षा कर रही हो।
कवि को ऐसा लगता है कि कोयल अपनी कूक के माध्यम से प्रकृति के सौंदर्य और कोमलता को बनाए रखने का प्रयास कर रही है, जो कठिन परिस्थितियों में भी आशा और सकारात्मकता का संदेश देती है। यह पंक्ति कोयल की कूक को जीवन की कोमलता और सृजनात्मकता का प्रतीक मानती है।
(ख)हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जूआ , खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कुँआ।
उत्तर-"हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जूआ, खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कुँआ" में कवि अपनी कठिनाई और संघर्ष को व्यक्त कर रहा है। वह अपने पेट की भूख को शांत करने के लिए कठिन मेहनत कर रहा है, जैसे कि वह जीवन के जोखिम और मुश्किलों से जूझ रहा हो। "ब्रिटिश अकड़ का कुँआ" में कवि ब्रिटिश शासन की घमंड और शक्ति को चुनौती दे रहा है, जिसे वह खत्म करने या नष्ट करने की कोशिश कर रहा है। यह पंक्ति ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ कवि के विद्रोह और संघर्ष को दर्शाती है।
प्रश्न-६-अर्धरात्रि में कोयल की चीख से कवि को क्या अंदेशा है ?
उत्तर-अर्धरात्रि में कोयल की चीख सुनकर कवि कई तरह के अनुमान लगाते हैं। वह सोचते हैं कि शायद कोयल कोई महत्वपूर्ण संदेश लाकर आई हो या फिर उसे कोई पीड़ा हो । इसके अलावा, यह भी हो सकता है कि कोयल कैदियों पर हो रहे अत्याचार से दुखी होकर चीख रही हो। कवि यह भी मानते हैं कि कोयल अपनी चीख के माध्यम से लोगों के मन में विद्रोह का बीज बोने का प्रयास कर रही हो।
प्रश्न-७-कवि को कोयल से ईष्र्या क्यों हो रही है ?
उत्तर-कवि को कोयल से ईष्र्या इस लिए हो रही है क्योंकि कोयल के पास वह सुख और स्वतंत्रता है, जो कवि के पास नहीं है। कोयल को प्रकृति में खुला आकाश और शांति मिलती है, जबकि कवि को संघर्ष, बंदीगृह और अत्याचारों का सामना करना पड़ता है। कवि यह महसूस करता है कि कोयल अपनी मधुर आवाज के साथ अपने स्वभाव से स्वतंत्र है, जबकि वह खुद स्वतंत्रता से वंचित है। इस असमानता और विषमता के कारण उसे कोयल से ईष्र्या होती है।
प्रश्न-८-कवि के स्मृति-पटल पर कोयल के गीतों की कौन सी मधुर स्मृतियाँ अंकित हैं, जिन्हें वह अब नष्ट करने पर तुली है ?
उत्तर-कोयल अपने मीठे और सुरीले स्वर के लिए प्रसिद्ध है, और उसके गीतों को सुनकर लोग आनंदित होते हैं। कवि के स्मृति पटल पर भी कोयल के मधुर गीत हैं, जो उसे शांति और सुख का अहसास कराते थे। लेकिन यहां पर कोयल अचानक कर्कश स्वर में चीख रही है, जो कवि को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है। यह कर्कश आवाज कवि की उन मीठी यादों को नष्ट कर रही है, जो उसने पहले कोयल के गीतों से जुड़ी थीं। इस बदलाव से कवि को यह महसूस होता है कि कोयल के स्वर अब दुख और संकट की चुपके से चेतावनी दे रहे हैं, न कि पहले की तरह सुख और आनंद का संदेश।
प्रश्न-९-हथकड़ियों को गहना क्यों कहा गया है ?
उत्तर-कवि को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल में डाला गया और उनके हाथों में हथकड़ियां पहना दी गईं। हालांकि, कवि इन हथकड़ियों को मुसीबत के बजाय गहना मानकर खुशी-खुशी पहनने को स्वीकार करते हैं। उनका मानना है कि यही हथकड़ियां उनके संघर्ष और बलिदान का प्रतीक हैं, जो भारत को स्वतंत्रता की ओर अग्रसर करने में मदद करेंगी। कवि के लिए ये हथकड़ियां एक गर्व का विषय बन जाती हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि इस कष्ट के बावजूद, उनका योगदान स्वतंत्रता प्राप्ति में महत्वपूर्ण होगा। इस तरह, कवि ने हथकड़ियों को शारीरिक बंधन से अधिक एक गर्व और सम्मान के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया है, जो उनके राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान को दर्शाता है।
प्रश्न-१०- “काली तू …. ऐ आली !” इन पंक्तियों में “काली” शब्द की आवृत्ति से उत्पन्न चमत्कार का विवेचन कीजिए ?
उत्तर-कविता की इन पंक्तियों में "काली "शब्द का प्रयोग अनेक अर्थों के रूप में हुआ,कवी बार-बार काली शब्द का प्रयोग करके मनोभावना प्रकट करना चाहता है।
शासन की करनी भी काली ,
काली लहर कल्पना काली ,
मेरी काल कोठरी काली ,---------ये पंक्तिआं अन्याय के अर्थ के लिए प्रयोग हुई
टोपी काली, कमली काली ,
मेरी लौह श्रृंखला काली ,----------ये पंक्तिआं भयानकके अर्थ के लिए प्रयोग हुई
पहरे की हुंकृति की व्याली ,
तिस पर है गाली ए आली।
देख विषमता तेरी-मेरी, बजा रही तिस पर रणभेरी !
उत्तर-कवि को कोयल और अपनी स्थिति के बीच गहरी असमानता महसूस होती है। कोयल के मधुर गीतों की हर जगह प्रशंसा होती है, जबकि कवि की अपनी पीड़ा और आंसू तक को अभिव्यक्त करना "गुनाह" समझा जाता है। यह विषमता कवि को आक्रोश से भर देती है, और वह महसूस करता है कि यह अन्यायपूर्ण स्थिति एक चेतावनी की तरह है, जैसे कोई युद्ध की रणभेरी बजा रहा हो। कवि इन परिस्थितियों को समाज की विषमता और अन्याय के प्रतीक के रूप में देखता है।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न-१२-कवि जेल के आसपास अन्य पक्षियों का चहकना भी सुनता होगा लेकिन उसने कोकिला से ही बात क्यों की है ?
उत्तर-कवि ने कोयल से बात इसलिए की क्योंकि कोयल के गीत अन्य पक्षियों के चहकने से अलग होते हैं। कोयल अपनी मधुरता और प्रभावशाली आवाज के लिए जानी जाती है, लेकिन यहां कोयल अपनी सामान्य मिठास छोड़कर चीख रही है। यह चीख कवि को असामान्य और अर्थपूर्ण लगती है, जैसे कोयल किसी विशेष संदेश या चेतावनी देने की कोशिश कर रही हो। इसी कारण कवि का ध्यान कोयल की ओर गया और उसने उससे संवाद किया।
प्रश्न-१३-आपके विचार से स्वतंत्रता सेनानियों और अपराधियों के साथ एक-सा व्यवहार क्यों किया जाता होगा ?
उत्तर-स्वतंत्रता सेनानियों और अपराधियों के साथ एक-सा व्यवहार इसलिए किया जाता होगा क्योंकि उस समय के शासक स्वतंत्रता आंदोलन को अपने शासन के लिए खतरा मानते थे। वे स्वतंत्रता सेनानियों को अपराधी के रूप में देखते थे क्योंकि वे शासक के कानूनों का विरोध करते थे और जनता को जागरूक करने का काम करते थे। शासक यह समझते थे कि यदि स्वतंत्रता सेनानियों को आम अपराधियों से अलग और सम्मानजनक व्यवहार दिया गया, तो इससे जनता के बीच उनकी छवि और अधिक मजबूत होगी, और आंदोलन को और बल मिलेगा। इसलिए, स्वतंत्रता सेनानियों को दंडित करके और अपराधियों जैसा व्यवहार करके उनका मनोबल तोड़ने और आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया जाता था।
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